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श्रीमद्भगवद्गीता · क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 30

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga

मूल पाठ

प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः | यः पश्यति तथाऽऽत्मानमकर्तारं स पश्यति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो सम्पूर्ण क्रियाओंको सब प्रकारसे प्रकृतिके द्वारा ही की जाती हुई देखता है और अपने-आपको अकर्ता देखता (अनुभव करता) है, वही यथार्थ देखता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो सम्पूर्ण क्रियाओंको सब प्रकारसे प्रकृतिके द्वारा ही की जाती हुई देखता है और अपने-आपको अकर्ता देखता (अनुभव करता) है, वही यथार्थ देखता है।

English Meaning

He sees, who sees that all actions are performed by Nature alone and that the Self is actionless.

He sees, who sees that all actions are performed by Nature alone and that the Self is actionless.

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