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श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 5

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसंभवाः | निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे महाबाहो ! प्रकृतिसे उत्पन्न होनेवाले सत्त्व, रज और तम -- ये तीनों गुण अविनाशी देहीको देहमें बाँध देते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे महाबाहो ! प्रकृतिसे उत्पन्न होनेवाले सत्त्व, रज और तम -- ये तीनों गुण अविनाशी देहीको देहमें बाँध देते हैं।

English Meaning

Purity, passion and inertia these qualities, O Arjuna, born of Nature, bind fast in the body, the embodied, the indestructible.

Purity, passion and inertia these qualities, O Arjuna, born of Nature, bind fast in the body, the embodied, the indestructible.

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