ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · सांख्य योग

श्लोक 30

सांख्य योग · Sankhya Yoga

मूल पाठ

देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत | तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! सबके देहमें यह देही नित्य ही अवध्य है। इसलिये सम्पूर्ण प्राणियोंके लिये अर्थात् किसी भी प्राणीके लिये तुम्हें शोक नहीं करना चाहिये।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! सबके देहमें यह देही नित्य ही अवध्य है। इसलिये सम्पूर्ण प्राणियोंके लिये अर्थात् किसी भी प्राणीके लिये तुम्हें शोक नहीं करना चाहिये।

English Meaning

This, the Indweller in the body of everyone, is ever indestructible, O Arjuna; therefore, thou shouldst not grieve for any creature.

This, the Indweller in the body of everyone, is ever indestructible, O Arjuna; therefore, thou shouldst not grieve for any creature.

आगे पढ़ें — सांख्य योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता