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श्रीमद्भगवद्गीता · सांख्य योग

श्लोक 61

सांख्य योग · Sankhya Yoga

मूल पाठ

तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः | वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कर्मयोगी साधक उन सम्पूर्ण इन्द्रियोंको वशमें करके मेरे परायण होकर बैठे; क्योंकि जिसकी इन्द्रियाँ वशमें हैं, उसकी बुद्धि प्रतिष्ठित है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

कर्मयोगी साधक उन सम्पूर्ण इन्द्रियोंको वशमें करके मेरे परायण होकर बैठे; क्योंकि जिसकी इन्द्रियाँ वशमें हैं, उसकी बुद्धि प्रतिष्ठित है।

English Meaning

Having restrained them all he should sit steadfast, intent on Me; his wisdom is steady whose senses are under control.

Having restrained them all he should sit steadfast, intent on Me; his wisdom is steady whose senses are under control.

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