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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 4

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते | न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मनुष्य न तो कर्मोंका आरम्भ किये बिना निष्कर्मताको प्राप्त होता है और न कर्मोंके त्यागमात्रसे सिद्धिको ही प्राप्त होता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मनुष्य न तो कर्मोंका आरम्भ किये बिना निष्कर्मताको प्राप्त होता है और न कर्मोंके त्यागमात्रसे सिद्धिको ही प्राप्त होता है।

English Meaning

Not by non-performance of actions does man reach actionlessness; nor by mere renunciation does he attain to perfection.

Not by non-performance of actions does man reach actionlessness; nor by mere renunciation does he attain to perfection.

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