एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः | स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप
अर्थ: हे परंतप! इस तरह परम्परासे प्राप्त इस कर्मयोग को राजर्षियोंने जाना। परन्तु बहुत समय बीत जानेके कारण वह योग इस मनुष्यलोकमें लुप्तप्राय हो गया।
ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga
श्रीभगवानुवाच | इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् | विवस्वान् मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्
श्रीभगवान् बोले - मैंने इस अविनाशी योगको सूर्यसे कहा था। फिर सूर्यने (अपने पुत्र) वैवस्वत मनुसे कहा और मनुने (अपने पुत्र) राजा इक्ष्वाकुसे कहा।
श्रीभगवान् बोले - मैंने इस अविनाशी योगको सूर्यसे कहा था। फिर सूर्यने (अपने पुत्र) वैवस्वत मनुसे कहा और मनुने (अपने पुत्र) राजा इक्ष्वाकुसे कहा।
The Blessed Lord said I taught this imperishable Yoga to Vivasvan; he told it to Manu; Manu proclaimed it to Ikshvaku.
The Blessed Lord said I taught this imperishable Yoga to Vivasvan; he told it to Manu; Manu proclaimed it to Ikshvaku.
आगे पढ़ें — ज्ञान कर्म संन्यास योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता