श्रीभगवानुवाच | इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् | विवस्वान् मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्
अर्थ: श्रीभगवान् बोले - मैंने इस अविनाशी योगको सूर्यसे कहा था। फिर सूर्यने (अपने पुत्र) वैवस्वत मनुसे कहा और मनुने (अपने पुत्र) राजा इक्ष्वाकुसे कहा।
ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga
स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः | भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्
तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिये वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझसे कहा है; क्योंकि यह बड़ा उत्तम रहस्य है।
तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिये वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझसे कहा है; क्योंकि यह बड़ा उत्तम रहस्य है।
That same ancient Yoga has been today taught to thee by Me, for thou art My devotee and My friend; it is the supreme secret.
That same ancient Yoga has been today taught to thee by Me, for thou art My devotee and My friend; it is the supreme secret.
आगे पढ़ें — ज्ञान कर्म संन्यास योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता