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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 3

ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः | भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिये वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझसे कहा है; क्योंकि यह बड़ा उत्तम रहस्य है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिये वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझसे कहा है; क्योंकि यह बड़ा उत्तम रहस्य है।

English Meaning

That same ancient Yoga has been today taught to thee by Me, for thou art My devotee and My friend; it is the supreme secret.

That same ancient Yoga has been today taught to thee by Me, for thou art My devotee and My friend; it is the supreme secret.

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