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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म संन्यास योग

श्लोक 14

कर्म संन्यास योग · Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः | न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

परमेश्वर मनुष्योंके न कर्तापनकी, न कर्मोंकी और न कर्मफलके साथ संयोगकी रचना करते हैं; किन्तु स्वभाव ही बरत रहा है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

परमेश्वर मनुष्योंके न कर्तापनकी, न कर्मोंकी और न कर्मफलके साथ संयोगकी रचना करते हैं; किन्तु स्वभाव ही बरत रहा है।

English Meaning

Neither agency nor actions does the Lord create for the world, nor union with the fruits of actions. But it is Nature that acts.

Neither agency nor actions does the Lord create for the world, nor union with the fruits of actions. But it is Nature that acts.

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