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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म संन्यास योग

श्लोक 15

कर्म संन्यास योग · Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभुः | अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सर्वव्यापी परमात्मा न किसीके पापकर्मको और न शुभकर्मको ही ग्रहण करता है; किन्तु अज्ञानसे ज्ञान ढका हुआ है, उसीसे सब जीव मोहित हो रहे हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

सर्वव्यापी परमात्मा न किसीके पापकर्मको और न शुभकर्मको ही ग्रहण करता है; किन्तु अज्ञानसे ज्ञान ढका हुआ है, उसीसे सब जीव मोहित हो रहे हैं।

English Meaning

The Lord takes neither the demerit nor even the merit of any; knowledge is enveloped by ignorance, thereby beings are deluded.

The Lord takes neither the demerit nor even the merit of any; knowledge is enveloped by ignorance, thereby beings are deluded.

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