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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म संन्यास योग

श्लोक 19

कर्म संन्यास योग · Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः | निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिनका अन्तःकरण समतामें स्थित है, उन्होंने इस जीवित-अवस्थामें ही सम्पूर्ण संसारको जीत लिया है; ब्रह्म निर्दोष और सम है, इसलिये वे ब्रह्ममें ही स्थित हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिनका अन्तःकरण समतामें स्थित है, उन्होंने इस जीवित-अवस्थामें ही सम्पूर्ण संसारको जीत लिया है; ब्रह्म निर्दोष और सम है, इसलिये वे ब्रह्ममें ही स्थित हैं।

English Meaning

Even here (in this world) birth (everything) is overcome by those whose minds rest in equality; Brahman is spotless indeed and equal; therefore they are established in Brahman.

Even here (in this world) birth (everything) is overcome by those whose minds rest in equality; Brahman is spotless indeed and equal; therefore they are established in Brahman.

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