ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 2

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन | प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अर्जुन बोले -- हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसको कहा गया है? और अधिदैव किसको कहा जाता है? यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस देहमें कैसे है? हे मधूसूदन ! नियतात्मा (वशीभूत अन्तःकरणवाले) मनुष्यके द्वारा अन्तकालमें आप कैसे जाननेमें आते हैं?

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अर्जुन बोले -- हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसको कहा गया है? और अधिदैव किसको कहा जाता है? यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस देहमें कैसे है? हे मधूसूदन ! नियतात्मा (वशीभूत अन्तःकरणवाले) मनुष्यके द्वारा अन्तकालमें आप कैसे जाननेमें आते हैं?

English Meaning

Who and how is Adhiyajna here in this body, O destroyer of Madhu (Krishna)? And how at the time of death, art Thou to be known by the self-controlled?

Who and how is Adhiyajna here in this body, O destroyer of Madhu (Krishna)? And how at the time of death, art Thou to be known by the self-controlled?

आगे पढ़ें — अक्षर ब्रह्म योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता