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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड चौपाई 11

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

अनूप रूप भूपतिं। नतोऽहमुर्विजा पतिं॥ प्रसीद मे नमामि ते। पदाब्ज भक्ति देहि मे॥11॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे अनुपम सुंदर, हे पृथ्वीपति, हे जानकीनाथ, मैं आपको प्रणाम करता हूँ। मुझ पर प्रसन्न होइए, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। मुझे अपने चरण कमलों की भक्ति दीजिए॥11॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 11 अरण्य काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik