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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

चौपाई 9

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

तमेकमद्भुतं प्रभुं। निरीहमीश्वरं विभुं॥ जगद्गुरुं च शाश्वतं। तुरीयमेव केवलं॥9॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उन (आप) को जो एक (अद्वितीय), अद्भुत (मायिक जगत से विलक्षण), प्रभु (सर्वसमर्थ), इच्छारहित, ईश्वर (सबके स्वामी), व्यापक, जगद्गुरु, सनातन (नित्य), तुरीय (तीनों गुणों से सर्वथा परे) और केवल (अपने स्वरूप में स्थित) हैं॥9॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 9 अरण्य काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik