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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड दोहा 13

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

गीधराज सै भेंट भइ बहु बिधि प्रीति बढ़ाइ। गोदावरी निकट प्रभु रहे परन गृह छाइ॥13॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वहाँ गृध्रराज जटायु से भेंट हुई। उसके साथ बहुत प्रकार से प्रेम बढ़ाकर प्रभु श्री रामचंद्रजी गोदावरीजी के समीप पर्णकुटी छाकर रहने लगे॥13॥

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