ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

दोहा 22

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

सूपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु भाँति। गयउ भवन अति सोचबस नीद परइ नहिं राति॥22॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उसने शूर्पणखा को समझाकर बहुत प्रकार से अपने बल का बखान किया, किन्तु (मन में) वह अत्यन्त चिंतावश होकर अपने महल में गया, उसे रात भर नींद नहीं पड़ी॥22॥

आगे पढ़ें — अरण्य काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस