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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

दोहा 23

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

लछिमन गए बनहिं जब लेन मूल फल कंद। जनकसुता सन बोले बिहसि कृपा सुख बृंद॥23॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

लक्ष्मणजी जब कंद-मूल-फल लेने के लिए वन में गए, तब (अकेले में) कृपा और सुख के समूह श्री रामचंद्रजी हँसकर जानकीजी से बोले-॥23॥

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