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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड दोहा 9

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह। सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि जाइ जाइ सुख दीन्ह॥9॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामजी ने भुजा उठाकर प्रण किया कि मैं पृथ्वी को राक्षसों से रहित कर दूँगा। फिर समस्त मुनियों के आश्रमों में जा-जाकर उनको (दर्शन एवं सम्भाषण का) सुख दिया॥9॥

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