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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड चौपाई 192

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

गहहु घाट भट समिटि सब लेउँ मरम मिलि जाइ। बूझि मित्र अरि मध्य गति तस तब करिहउँ आइ॥192॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अतएव हे वीरों! तुम लोग इकट्ठे होकर सब घाटों को रोक लो, मैं जाकर भरतजी से मिलकर उनका भेद लेता हूँ। उनका भाव मित्र का है या शत्रु का या उदासीन का, यह जानकर तब आकर वैसा (उसी के अनुसार) प्रबंध करूँगा॥192॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 192 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik