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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 5

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

पुनि प्रभु हरषि सत्रुहन भेंटे हृदयँ लगाइ। लछिमन भरत मिले तब परम प्रेम दोउ भाइ॥5॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फिर प्रभु हर्षित होकर शत्रुघ्नजी को हृदय से लगाकर उनसे मिले। तब लक्ष्मणजी और भरतजी दोनों भाई परम प्रेम से मिले॥।5॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 5 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik