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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 5

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

अवधपुरी प्रभु आवत जानी। भई सकल सोभा कै खानी॥ बहइ सुहावन त्रिबिध समीरा। भइ सरजू अति निर्मल नीरा॥5॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रभु को आते जानकर अवधपुरी संपूर्ण शोभाओं की खान हो गई। तीनों प्रकार की सुंदर वायु बहने लगी। सरयूजी अति निर्मल जल वाली हो गईं। (अर्थात्‌ सरयूजी का जल अत्यंत निर्मल हो गया)॥5॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 5 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik