ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
स्कन्ध 1

श्रीमद्भागवतम्प्रथम स्कन्ध

कुल 19 अध्याय

अध्याय 1

श्रीसूतजीसे शौनकादि ऋषियोंका प्रश्न

इस अध्याय में श्रीमद्भागवतका मंगलाचरण, भागवतश्रवणकी महिमा और नैमिषारण्यमें शौनकादि ऋषियोंद्वारा सूतजीसे कलियुगके जीवोंके परम कल्याण, भगवान् श्रीकृष्णके अवतारों और उनके स्वधामगमनके बाद धर्मकी शरणके विषयमें प्रश्न किये गये हैं।

5 मिनट का पाठ809 शब्द
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अध्याय 2

भगवत्कथा और भगवद्भक्तिका माहात्म्य

इस अध्याय में सूतजी शौनकादि ऋषियोंके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए श्रीशुकदेवजीको प्रणाम करते हैं और बताते हैं कि मनुष्यका परम धर्म भगवान् श्रीकृष्णमें निष्काम, अखण्ड भक्ति है। भगवत्कथा, भागवतसेवा, ज्ञान-वैराग्य, चित्तशुद्धि, भगवान्के तत्त्वज्ञ…

5 मिनट का पाठ988 शब्द
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अध्याय 3

भगवान्के अवतारोंका वर्णन

इस अध्याय में भगवान्के पुरुषरूप, विराट्स्वरूप और अनेक अवतारोंका वर्णन है। सनकादि, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभदेव, पृथु, मत्स्य, कच्छप, धन्वन्तरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, राम, बलराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध और क…

7 मिनट का पाठ1,270 शब्द
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अध्याय 4

महर्षि व्यासका असन्तोष

इस अध्याय में शौनकजी श्रीशुकदेवजी, राजा परीक्षित् और भागवतसंहिताके प्रसंगके विषय में सूतजीसे प्रश्न करते हैं। सूतजी व्यासजीके अवतार, वेदोंके विभाग, महाभारतकी रचना और उसके बाद भी व्यासजीके हृदयमें बने असन्तोषका वर्णन करते हैं। अन्तमें व्यासज…

5 मिनट का पाठ828 शब्द
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अध्याय 5

भगवान्के यश-कीर्तनकी महिमा और देवर्षि नारदजीका पूर्वचरित्र

इस अध्याय में देवर्षि नारद व्यासजीके असन्तोषका कारण बताते हैं कि उन्होंने भगवान्के निर्मल यश और लीलाओंका पर्याप्त वर्णन नहीं किया। नारदजी भगवन्नाम, भगवत्कथा और भगवान्को समर्पित कर्मकी महिमा समझाते हैं। वे अपने पूर्वजन्मका प्रसंग भी सुनाते ह…

7 मिनट का पाठ1,365 शब्द
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अध्याय 6

नारदजीके पूर्वचरित्रका शेष भाग

इस अध्याय में व्यासजी नारदजीसे उनके पूर्वजन्म, साधना, मृत्यु और स्मृति रह जानेका कारण पूछते हैं। नारदजी बताते हैं कि माता की मृत्युके बाद वे उत्तर दिशा चले गये, वनमें भगवान्का ध्यान किया और एक बार भगवान्के दर्शन पाकर उनका वचन सुना। आगे वे अ…

6 मिनट का पाठ1,101 शब्द
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अध्याय 7

अश्वत्थामाद्वारा द्रौपदीके पुत्रोंका मारा जाना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाका मानमर्दन

इस अध्याय में व्यासजी द्वारा भक्तियोगके साक्षात्कारके बाद श्रीमद्भागवतकी रचना और श्रीशुकदेवजीको उसका उपदेश बताया गया है। आगे शुकदेवजीके इस ग्रन्थके अध्ययनका कारण समझाकर राजर्षि परीक्षित्की कथा प्रारम्भ होती है। महाभारतयुद्धके बाद अश्वत्थामा…

8 मिनट का पाठ1,493 शब्द
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अध्याय 8

गर्भमें परीक्षित्की रक्षा, कुन्तीके द्वारा भगवान्की स्तुति और युधिष्ठिरका शोक

इस अध्याय में पाण्डवों द्वारा मृत स्वजनोंका तर्पण, श्रीकृष्ण द्वारा शोकाकुल परिजनोंको सांत्वना, उत्तराके गर्भमें परीक्षित्की ब्रह्मास्त्रसे रक्षा और कुन्तीकी भगवान् श्रीकृष्णके प्रति गहन स्तुति वर्णित है। अन्तमें श्रीकृष्णके जानेका प्रसंग आ…

9 मिनट का पाठ1,621 शब्द
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अध्याय 9

युधिष्ठिरादिका भीष्मजीके पास जाना और भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति करते हुए भीष्मजीका प्राणत्याग करना

इस अध्याय में राजा युधिष्ठिर प्रजाद्रोहके भयसे धर्मज्ञान पानेके लिये श्रीकृष्ण और पाण्डवोंके साथ शरशय्यापर स्थित भीष्मजीके पास जाते हैं। अनेक ऋषियोंकी उपस्थिति में भीष्मजी श्रीकृष्णको परमात्मा और नारायणस्वरूप बताते हैं, युधिष्ठिरको धर्म और…

8 मिनट का पाठ1,515 शब्द
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अध्याय 10

श्रीकृष्णका द्वारका-गमन

इस अध्याय में महाराज युधिष्ठिरके धर्मपूर्ण शासन, श्रीकृष्णके कुछ समय हस्तिनापुरमें रहने और फिर द्वारका जानेका वर्णन है। पाण्डवों तथा कुरुवंशकी स्त्रियोंका श्रीकृष्ण-विरह, प्रस्थानके समय नगरकी शोभा, स्त्रियों द्वारा भगवान्की महिमा-वाणी और मा…

6 मिनट का पाठ1,094 शब्द
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अध्याय 11

द्वारकामें श्रीकृष्णका राजोचित स्वागत

इस अध्याय में भगवान् श्रीकृष्णके आनर्त देश और द्वारकापुरीमें आगमन, पांचजन्य शंखध्वनि, द्वारकावासियोंकी हर्षभरी स्तुति और नगरकी राजोचित सज्जाका वर्णन है। वसुदेव, बलराम, प्रद्युम्न आदि उनके स्वागतको आते हैं, नगरकी स्त्रियाँ अटारियोंसे भगवान्क…

7 मिनट का पाठ1,210 शब्द
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अध्याय 12

परीक्षित्का जन्म

इस अध्याय में उत्तराके गर्भमें परीक्षित्की रक्षा, परीक्षित्के जन्म, ब्राह्मणोंद्वारा उनके गुणों और भविष्यका वर्णन, तथा युधिष्ठिरके अश्वमेधयज्ञकी तैयारी और भगवान् श्रीकृष्णके द्वारका-प्रस्थानका वर्णन है।

5 मिनट का पाठ879 शब्द
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अध्याय 13

विदुरजीके उपदेशसे धृतराष्ट्र और गान्धारीका वनमें जाना

इस अध्याय में विदुरजीके हस्तिनापुर लौटने, युधिष्ठिरादि द्वारा उनके सत्कार, विदुरजीके उपदेशसे धृतराष्ट्र और गान्धारीके वनगमन, तथा नारदजी द्वारा युधिष्ठिरको उनके योगमार्ग और भविष्यका समाचार देनेका वर्णन है।

9 मिनट का पाठ1,604 शब्द
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अध्याय 14

अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिरका शंका करना और अर्जुनका द्वारकासे लौटना

इस अध्याय में अर्जुनके द्वारकासे देर तक न लौटनेपर युधिष्ठिरको दिखे भयंकर अपशकुन, कृष्णके लीला-विग्रह संवरणकी आशंका, अर्जुनकी दीन अवस्था और युधिष्ठिरके प्रश्नोंका वर्णन है।

6 मिनट का पाठ1,157 शब्द
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अध्याय 15

कृष्णविरहव्यथित पाण्डवोंका परीक्षित्को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना

इस अध्याय में अर्जुनका श्रीकृष्ण-विरह, यादवोंके संहार और श्रीकृष्णके स्वधामगमनका वृत्तान्त, पाण्डवोंका परीक्षित्को राज्य देकर महाप्रस्थान करना तथा द्रौपदी और विदुरकी परम गति प्राप्ति वर्णित है।

9 मिनट का पाठ1,738 शब्द
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अध्याय 16

परीक्षित्की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद

इस अध्याय में राजा परीक्षित्की दिग्विजय, कलियुगको दण्ड देनेका प्रसंग, धर्मरूपी बैल और पृथ्वीरूपी गायका संवाद तथा भगवान् श्रीकृष्णके विरहसे पृथ्वीका शोक वर्णित है।

7 मिनट का पाठ1,262 शब्द
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अध्याय 17

महाराज परीक्षित्द्वारा कलियुगका दमन

इस अध्याय में महाराज परीक्षित्द्वारा धर्म और पृथ्वीको आश्वासन देना, कलियुगको दण्डित करना, उसके लिये पाँच स्थान निर्धारित करना तथा धर्मके तीन चरणोंकी पुनः स्थापना वर्णित है।

7 मिनट का पाठ1,205 शब्द
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अध्याय 18

राजा परीक्षित्को शृंगी ऋषिका शाप

इस अध्याय में ऋषियोंद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी कथामृतकी महिमा, राजा परीक्षित्का शिकारमें थककर शमीक मुनिके आश्रम जाना, मुनिका अपमान होना, शृंगी ऋषिकुमारका शाप और शमीक मुनिका पश्चात्ताप वर्णित है।

8 मिनट का पाठ1,481 शब्द
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अध्याय 19

परीक्षित्का अनशनव्रत और शुकदेवजीका आगमन

इस अध्याय में राजा परीक्षित्का अपने अपराधपर पश्चात्ताप, तक्षकके शापको वैराग्यका कारण मानकर गंगातटपर आमरण अनशनव्रत लेना, महान् ऋषियोंका आगमन और श्रीशुकदेवजीसे परम कर्तव्यका प्रश्न करना वर्णित है।

7 मिनट का पाठ1,378 शब्द
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