ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
स्कन्ध 2

श्रीमद्भागवतम्द्वितीय स्कन्ध

कुल 10 अध्याय

अध्याय 1

ध्यान-विधि और भगवान्के विराट्स्वरूपका वर्णन

इस अध्याय में श्रीशुकदेवजी राजा परीक्षित्के प्रश्नकी महिमा बताकर मृत्युके समय भगवान्का श्रवण, कीर्तन और स्मरण करनेका उपदेश देते हैं तथा योगधारणा और भगवान्के विराट्स्वरूपका वर्णन करते हैं।

6 मिनट का पाठ1,145 शब्द
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अध्याय 2

भगवान्के स्थूल और सूक्ष्मरूपोंकी धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्तिका वर्णन

इस अध्याय में श्रीशुकदेवजी भगवान्के सूक्ष्म ध्यान, वैराग्य, अंगधारणा, योगीके शरीरत्याग, क्रममुक्ति, सद्योमुक्ति और भगवान्की अनन्य भक्ति को मनुष्यका परम कल्याणकारी मार्ग बताते हैं।

8 मिनट का पाठ1,515 शब्द
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अध्याय 3

कामनाओंके अनुसार विभिन्न देवताओंकी उपासना तथा भगवद्भक्तिके प्राधान्यका निरूपण

इस अध्याय में विभिन्न कामनाओंके लिये देवताओंकी उपासना बताकर निष्काम, सकाम और मोक्षकामी सभीके लिये तीव्र भक्तियोगसे परम पुरुषकी आराधना श्रेष्ठ कही गयी है। शौनकजी भगवान्की कथाके श्रवण, कीर्तन और भक्तिसंगकी महिमा भी कहते हैं।

4 मिनट का पाठ744 शब्द
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अध्याय 4

राजाका सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजीका कथारम्भ

इस अध्याय में परीक्षित् श्रीशुकदेवजीसे भगवान्की मायासे सृष्टि, स्थिति और संहारका प्रश्न करते हैं। श्रीशुकदेवजी भगवान् श्रीकृष्णका स्मरण करके कथारम्भ करते हैं और भगवान्, व्यास तथा भक्तिशरणकी महिमा कहते हैं।

5 मिनट का पाठ904 शब्द
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अध्याय 5

सृष्टि-वर्णन

इस अध्याय में नारदजी ब्रह्माजीसे सृष्टि और आत्मतत्त्वका प्रश्न करते हैं। ब्रह्माजी नारायणको सर्वकारण बताकर गुण, अहंकार, पंचमहाभूत, इन्द्रियों, देवताओं और विराट् पुरुषमें लोकोंकी कल्पना का वर्णन करते हैं।

6 मिनट का पाठ1,154 शब्द
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अध्याय 6

विराट्स्वरूपकी विभूतियोंका वर्णन

इस अध्याय में ब्रह्माजी विराट् पुरुषके अंगोंसे वाणी, इन्द्रियों, देवताओं, लोकों, प्राणियों और यज्ञ-सामग्रीकी उत्पत्ति का वर्णन करते हैं। आगे वे भगवान्को सृष्टि, स्थिति, संहार और समस्त विभूतियोंका मूल बताकर उनके लीलावतारोंके वर्णनकी भूमिका रखते हैं।

7 मिनट का पाठ1,286 शब्द
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अध्याय 7

भगवान्के लीलावतारोंकी कथा

इस अध्याय में ब्रह्माजी नारदजीको भगवान्के अनेक लीलावतारोंका वर्णन करते हैं। वराह, कपिल, दत्तात्रेय, नर-नारायण, ध्रुवपर कृपा, पृथु, ऋषभदेव, मत्स्य, कच्छप, नृसिंह, वामन, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण, व्यास, बुद्ध और कल्कि आदि रूपोंके माध्यमसे…

13 मिनट का पाठ2,416 शब्द
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अध्याय 8

राजा परीक्षित्के विविध प्रश्न

इस अध्याय में राजा परीक्षित् शुकदेवजीसे नारदजीको दिये गये ब्रह्माजीके उपदेश, भगवान्की लीलाओं, विराट् पुरुष, काल, कर्मगति, लोकोंकी रचना, धर्म, योग, वेद-पुराण, बन्ध-मोक्ष और भगवान्की माया आदि विषयोंपर क्रमशः प्रश्न करते हैं। अन्तमें सूतजी बता…

4 मिनट का पाठ739 शब्द
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अध्याय 9

ब्रह्माजीका भगवद्धामदर्शन और भगवान्के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवतका उपदेश

इस अध्याय में शुकदेवजी परीक्षित्को आत्मा और माया का सम्बन्ध समझाते हैं, फिर ब्रह्माजीकी तपस्या, भगवान्के धामका दर्शन और भगवान्से प्राप्त चतुःश्लोकी भागवतका उपदेश बताते हैं। अन्तमें भगवान्के उपदेशके बाद ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि-रचना, नारदजीको…

8 मिनट का पाठ1,586 शब्द
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अध्याय 10

भागवतके दस लक्षण

इस अध्याय में शुकदेवजी भागवतपुराणके दस लक्षण—सर्ग, विसर्ग, स्थान, पोषण, ऊति, मन्वन्तर, ईशानुकथा, निरोध, मुक्ति और आश्रय—का निरूपण करते हैं। आगे विराट् पुरुषसे इन्द्रियों, देवताओं और विषयोंकी उत्पत्ति, भगवान्के स्थूल-सूक्ष्म रूप, सृष्टि-पालन…

8 मिनट का पाठ1,502 शब्द
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