ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
स्कन्ध 3

श्रीमद्भागवतम्तृतीय स्कन्ध

कुल 9 अध्याय

अध्याय 1

उद्धव और विदुरकी भेंट

इस अध्याय में परीक्षित् मैत्रेय और विदुरके संवादके विषयमें पूछते हैं। शुकदेवजी धृतराष्ट्रके अन्याय, विदुरजीकी नीति, दुर्योधनद्वारा उनके अपमान और विदुरजीके तीर्थयात्रा-व्रतका वर्णन करते हैं। आगे विदुरजी प्रभास और सरस्वतीतटसे होते हुए यमुनातट…

8 मिनट का पाठ1,525 शब्द
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अध्याय 2

उद्धवजीद्वारा भगवान्की बाललीलाओंका वर्णन

इस अध्याय में विदुरजीके प्रश्न सुनकर उद्धवजी श्रीकृष्णके विरहमें भावविह्वल हो जाते हैं। वे भगवान्के सौन्दर्य, राजसूयमें उनके दर्शन, व्रजवासियोंपर उनके प्रभाव, देवकी-वसुदेवके प्रति विनय, शिशुपालादि योद्धाओंकी गति और श्रीकृष्णकी बाललीलाओं—पूत…

6 मिनट का पाठ1,090 शब्द
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अध्याय 3

भगवान्के अन्य लीलाचरित्रोंका वर्णन

इस अध्यायमें उद्धवजी भगवान् श्रीकृष्णके मथुरा-प्रवेश, कंस-वध, गुरु-दक्षिणा, रुक्मिणीहरण, सत्यासे विवाह, पारिजात-हरण, भौमासुर-वध, राजकन्याओंके विवाह, अनेक असुरों और राजाओंके संहार, युधिष्ठिरके राज्यस्थापन, परीक्षितकी रक्षा, द्वारकालीला, वैरा…

4 मिनट का पाठ767 शब्द
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अध्याय 4

उद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना

इस अध्यायमें उद्धवजी यादवोंके विनाश, भगवान् श्रीकृष्णके सरस्वतीतटपर बैठने, उद्धवको बदरिकाश्रम जानेकी आज्ञा, मैत्रेयजीके आगमन, भगवान्द्वारा उद्धवको भागवतज्ञान देने, विदुरजीके शोक-शमन तथा विदुरजीके मैत्रेय ऋषिके पास जानेका वर्णन करते हैं।

6 मिनट का पाठ1,039 शब्द
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अध्याय 5

विदुरजीका प्रश्न और मैत्रेयजीका सृष्टिक्रमवर्णन

इस अध्यायमें विदुरजी मैत्रेय मुनिसे जीवोंके कल्याण, भगवान्की लीलाओं और सृष्टिक्रमके विषयमें प्रश्न करते हैं। मैत्रेयजी विदुरजीकी प्रशंसा कर भगवान्की माया, महत्तत्त्व, अहंकार, तन्मात्राओं, पंचभूतों और देवताओंकी प्रार्थनाओंका वर्णन आरम्भ करते हैं।

8 मिनट का पाठ1,515 शब्द
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अध्याय 6

विराट् शरीरकी उत्पत्ति

इस अध्यायमें मैत्रेय ऋषि विराट् पुरुषकी उत्पत्ति, तेईस तत्त्वोंके संगठन, विराट् शरीरमें देवताओं और इन्द्रियोंके प्रवेश, लोकोंकी रचना, वर्णोंकी उत्पत्ति तथा भगवान्की योगमायाकी अगम महिमाका वर्णन करते हैं।

5 मिनट का पाठ975 शब्द
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अध्याय 7

विदुरजीके प्रश्न

इस अध्यायमें विदुरजी भगवान्की निर्गुणता, माया, जीवके क्लेश, सृष्टिक्रम, विराट् पुरुष, प्रजापतियों, मन्वन्तरों, लोकों, जीव-योनियों, वर्णाश्रम, धर्म, योग, ज्ञान, प्रलय और भगवत्तत्त्वके विषयमें मैत्रेयजीसे अनेक प्रश्न करते हैं। मैत्रेयजी माया…

6 मिनट का पाठ1,075 शब्द
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अध्याय 8

ब्रह्माजीकी उत्पत्ति

इस अध्यायमें मैत्रेयजी विदुरजीको भागवतपुराणकी परम्परा बताते हैं और सृष्टिके पूर्व भगवान् नारायणके योगनिद्रामें शयन, नाभिकमलसे ब्रह्माजीकी उत्पत्ति, ब्रह्माजीकी खोज, तप, भगवान्के दिव्य दर्शन तथा स्तुति आरम्भ करनेका वर्णन करते हैं।

6 मिनट का पाठ1,109 शब्द
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अध्याय 9

ब्रह्माजीद्वारा भगवान्की स्तुति

इस अध्यायमें ब्रह्माजी भगवान्की स्तुति करते हैं, भगवान् उनकी प्रार्थना सुनकर उन्हें तप, भागवत-ज्ञान और सृष्टिरचनाका निर्देश देते हैं तथा अंतमें अपने नारायणरूपसे अदृश्य हो जाते हैं।

8 मिनट का पाठ1,573 शब्द
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