ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
स्कन्ध 5

श्रीमद्भागवतम्पञ्चम स्कन्ध

कुल 26 अध्याय

अध्याय 1

प्रियव्रत-चरित्र

इस अध्याय में राजा परीक्षित प्रियव्रतके गृहस्थाश्रममें प्रवृत्त होनेपर प्रश्न करते हैं। श्रीशुकदेवजी प्रियव्रतकी भगवद्भक्ति, ब्रह्माजीके उपदेश, पृथ्वी-पालन, सात द्वीपों और समुद्रोंकी रचना तथा अंतमें वैराग्यपूर्वक नारदजीके मार्गका अनुसरण करनेका वर्णन करते हैं।

9 मिनट का पाठ1,690 शब्द
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अध्याय 2

आग्नीध्र-चरित्र

इस अध्याय में राजा आग्नीध्रके तप, ब्रह्माजीद्वारा पूर्वचित्ति अप्सराके भेजे जाने, आग्नीध्रके उससे मोहित होकर संवाद करने, उनके नौ पुत्रोंके जन्म और जम्बूद्वीपके नौ वर्षोंके विभाजनका वर्णन है।

6 मिनट का पाठ1,019 शब्द
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अध्याय 3

राजा नाभिका चरित्र

इस अध्याय में राजा नाभि और मेरुदेवीके पुत्रकामेष्टि यज्ञ, यज्ञपुरुष भगवान्के प्रकट होने, ऋत्विजोंकी स्तुति, भगवान्द्वारा अपने ही समान पुत्रका वर देने और ऋषभदेवके अवतारका वर्णन है।

5 मिनट का पाठ881 शब्द
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अध्याय 4

ऋषभदेवजीका राज्यशासन

इस अध्याय में ऋषभदेवके दिव्य लक्षण, नाभिद्वारा उनका राज्याभिषेक, नाभिका बदरिकाश्रम गमन, ऋषभदेवका विवाह, उनके सौ पुत्रोंका वर्णन, भरतके नामसे भारतवर्षकी प्रसिद्धि और ऋषभदेवके धर्ममय शासनका वर्णन है।

4 मिनट का पाठ627 शब्द
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अध्याय 5

ऋषभजीका अपने पुत्रोंको उपदेश देना और स्वयं अवधूतवृत्ति ग्रहण करना

इस अध्याय में भगवान् ऋषभदेव अपने पुत्रोंको मनुष्यजीवनका लक्ष्य, महापुरुषसेवा, वासुदेवभक्ति, अहंकार और हृदयग्रन्थिके त्याग, ब्राह्मणोंके सम्मान तथा समस्त प्राणियोंमें भगवान्की सेवा करनेका उपदेश देते हैं। अंतमें वे भरतको राज्य देकर स्वयं दिगम…

9 मिनट का पाठ1,668 शब्द
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अध्याय 6

ऋषभदेवजीका देहत्याग

इस अध्याय में परीक्षित् योगसिद्धियोंके त्यागके विषयमें प्रश्न करते हैं। शुकदेवजी मनकी चंचलता और उसपर अविश्वासकी आवश्यकता समझाते हैं, फिर ऋषभदेवजीके देहत्याग, उनके आचरणका कलियुगमें गलत अनुकरण और उनके चरित्रश्रवणकी महिमा बताते हैं।

4 मिनट का पाठ729 शब्द
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अध्याय 7

भरत-चरित्र

इस अध्याय में महाराज भरतके राज्यपालन, पंचजनीसे विवाह, उनके पुत्रों, भारतवर्ष नामकी प्रसिद्धि, यज्ञोंके भगवदर्पण, पुलहाश्रम गमन और वहाँ भगवान् नारायणकी भक्ति-आराधनाका वर्णन है।

3 मिनट का पाठ541 शब्द
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अध्याय 8

भरतजीका मृगके मोहमें फँसकर मृगयोनिमें जन्म लेना

इस अध्याय में भरतजीका मृगशावकमें आसक्त हो जाना, साधनासे च्युत होना, अन्तकालमें उसी चिन्तनके कारण मृगयोनिमें जन्म लेना और पूर्वस्मृति रहते हुए पुनः वैराग्यपूर्वक शालग्रामक्षेत्रमें रहना वर्णित है।

7 मिनट का पाठ1,256 शब्द
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अध्याय 9

भरतजीका ब्राह्मणकुलमें जन्म

इस अध्याय में भरतजीका ब्राह्मणकुलमें जन्म, पूर्वजन्मस्मृति रहते हुए जडवत् आचरण, परिवारद्वारा उपेक्षा, खेतकी रखवाली और भद्रकालीकी बलिके प्रसंगमें देवीद्वारा उनकी रक्षा का वर्णन है।

6 मिनट का पाठ1,144 शब्द
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अध्याय 10

जडभरत और राजा रहूगणकी भेंट

इस अध्याय में जडभरतका राजा रहूगणकी पालकी उठाना, राजा द्वारा तिरस्कार, जडभरतका आत्मतत्त्वपर उपदेश और रहूगणका अहंकार छोड़कर क्षमा माँगना वर्णित है।

7 मिनट का पाठ1,330 शब्द
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अध्याय 11

राजा रहूगणको भरतजीका उपदेश

इस अध्याय में जडभरत राजा रहूगणको मन, इन्द्रियों, अहंकार, क्षेत्रज्ञ, परमात्मा वासुदेव और मनरूपी शत्रुके निवारणका तत्त्वज्ञान देते हैं।

4 मिनट का पाठ629 शब्द
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अध्याय 12

रहूगणका प्रश्न और भरतजीका समाधान

इस अध्याय में राजा रहूगण जडभरतसे अपने संशयका समाधान पूछते हैं। जडभरत देह, पृथ्वी, व्यवहार, मायिक द्वैत, वासुदेवस्वरूप परमज्ञान और महापुरुषोंके सत्संगकी महिमा समझाते हैं।

4 मिनट का पाठ640 शब्द
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अध्याय 13

भवाटवीका वर्णन और रहूगणका संशयनाश

इस अध्याय में जडभरत भवाटवीरूप संसारका रूपक देकर जीवकी मायामय गति, विषयासक्ति, कष्ट, भ्रम और सत्संगसे संशयनाशका वर्णन करते हैं। अंतमें रहूगणका संशय दूर होता है और परीक्षित् इस रूपकका स्पष्टीकरण पूछते हैं।

6 मिनट का पाठ1,105 शब्द
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अध्याय 14

भवाटवीका स्पष्टीकरण

इस अध्याय में श्रीशुकदेवजी भवाटवी रूपकका विस्तारपूर्वक स्पष्टीकरण करते हैं। इन्द्रियाँ, गृहस्थासक्ति, धन, विषयभोग, पाखण्ड, कालचक्र और संसारमार्गके संकटोंका वर्णन कर राजर्षि भरतकी महिमा कही गयी है।

10 मिनट का पाठ1,978 शब्द
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अध्याय 15

भरतके वंशका वर्णन

इस अध्याय में भरतजीके पुत्र सुमति से लेकर राजर्षि गय और आगे प्रियव्रतवंशमें उत्पन्न राजाओंका वर्णन किया गया है।

3 मिनट का पाठ563 शब्द
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अध्याय 16

भुवनकोशका वर्णन

इस अध्याय में राजा परीक्षित् द्वारा भूमण्डलके विस्तारका प्रश्न और श्रीशुकदेवजी द्वारा जम्बूद्वीप, इलावृतवर्ष, मेरु पर्वत, उसके आसपासके पर्वतों, नदियों, उपवनों और लोकपालोंकी पुरियोंका वर्णन किया गया है।

6 मिनट का पाठ1,004 शब्द
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अध्याय 17

गंगाजीका विवरण और भगवान् शंकरकृत संकर्षणदेवकी स्तुति

इस अध्याय में भगवान् विष्णुके चरणसे प्रकट भगवत्पदी गंगा, उसके ध्रुवलोक और मेरुसे प्रवाह, चार धाराओंमें विभाजन, भारतवर्षकी कर्मभूमि-स्थिति तथा इलावृतवर्षमें भगवान् शंकर द्वारा संकर्षणदेवकी स्तुति का वर्णन है।

6 मिनट का पाठ1,056 शब्द
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अध्याय 18

भिन्न-भिन्न वर्षोंका वर्णन

इस अध्याय में भद्राश्व, हरिवर्ष, केतुमाल, रम्यक, हिरण्मय और उत्तर कुरुवर्षोंमें भगवान् के हयग्रीव, नृसिंह, कामदेव, मत्स्य, कच्छप और वराह रूपोंकी उपासना का वर्णन है।

9 मिनट का पाठ1,608 शब्द
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अध्याय 19

किम्पुरुष और भारतवर्षका वर्णन

इस अध्याय में किम्पुरुषवर्षमें हनुमान्जी द्वारा भगवान् श्रीरामकी उपासना, भारतवर्षमें नर-नारायण भगवान् की तपस्या, भारतवर्षके पर्वतों-नदियों और कर्मभूमि-स्वरूपका वर्णन है।

7 मिनट का पाठ1,215 शब्द
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अध्याय 20

अन्य छः द्वीप तथा लोकालोकपर्वतका वर्णन

इस अध्याय में प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक और पुष्कर द्वीपों, उनके समुद्रों, पर्वतों, नदियों, उपासना-विधियों, लोकालोकपर्वत और सूर्यकी स्थिति का वर्णन है।

9 मिनट का पाठ1,602 शब्द
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अध्याय 21

सूर्यके रथ और उसकी गतिका वर्णन

इस अध्याय में सूर्यके रथ, उसकी गति, उत्तरायण-दक्षिणायन, दिन-रातके परिवर्तन, मानसोत्तर पर्वतपर सूर्यकी परिक्रमा, रथकी रचना और सूर्यकी उपासना करनेवाले गणोंका वर्णन है।

4 मिनट का पाठ681 शब्द
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अध्याय 22

भिन्न-भिन्न ग्रहोंकी स्थिति और गतिका वर्णन

इस अध्याय में राजा परीक्षित्के प्रश्नके उत्तरमें ग्रहोंकी गति, सूर्यके कालचक्र, चन्द्रमा, नक्षत्र, शुक्र, बुध, मंगल, बृहस्पति, शनैश्चर और सप्तर्षियोंकी स्थिति तथा गति का वर्णन है।

4 मिनट का पाठ676 शब्द
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अध्याय 23

शिशुमारचक्रका वर्णन

इस अध्याय में ध्रुवलोककी स्थिति, ज्योतिर्गणोंकी गति, भगवान्के शिशुमारचक्ररूप आधिदैविक स्वरूप और उसके ध्यान-वन्दनकी महिमा का वर्णन है।

3 मिनट का पाठ530 शब्द
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अध्याय 24

राहु आदिकी स्थिति, अतलादि नीचेके लोकोंका वर्णन

इस अध्याय में राहुकी स्थिति, ग्रहणका कारण, सिद्ध-चारणादि लोक, अतलसे पातालतक सात अधोलोकोंका वैभव, बल, हाटकेश्वर, राजा बलि, मयदानव, सर्प, दैत्य और नागलोकका वर्णन है।

8 मिनट का पाठ1,559 शब्द
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अध्याय 25

श्रीसङ्कर्षणदेवका विवरण और स्तुति

इस अध्याय में पातालके नीचे स्थित भगवान् अनन्त-संकर्षणका स्वरूप, उनकी महिमा, नागों और देवताओंद्वारा उनकी सेवा-स्तुति, नारदजीद्वारा उनके गुणगान और भोग-कामनावाले जीवोंकी गतियोंका संक्षिप्त उपसंहार वर्णित है।

4 मिनट का पाठ659 शब्द
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अध्याय 26

नरकोंकी विभिन्न गतियोंका वर्णन

इस अध्याय में राजा परीक्षित्के प्रश्नके उत्तरमें विविध नरकों, पापोंके अनुसार मिलनेवाली यमयातनाओं, पाप-पुण्यके फल और भगवान्के स्थूल विश्वरूपके वर्णनका उपसंहार किया गया है।

11 मिनट का पाठ2,121 शब्द
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