प्रियव्रत-चरित्र
इस अध्याय में राजा परीक्षित प्रियव्रतके गृहस्थाश्रममें प्रवृत्त होनेपर प्रश्न करते हैं। श्रीशुकदेवजी प्रियव्रतकी भगवद्भक्ति, ब्रह्माजीके उपदेश, पृथ्वी-पालन, सात द्वीपों और समुद्रोंकी रचना तथा अंतमें वैराग्यपूर्वक नारदजीके मार्गका अनुसरण करनेका वर्णन करते हैं।