नारद-युधिष्ठिर-संवाद और जय-विजयकी कथा
इस अध्याय में परीक्षित् भगवान्के समभाव और दैत्योंके वधके विषयमें प्रश्न करते हैं। शुकदेवजी नारद और युधिष्ठिरके संवादका प्रसंग सुनाते हैं, जिसमें शिशुपाल-दन्तवक्त्रकी मुक्ति, वैरभावसे भगवान्में तन्मयता और जय-विजयके शापसे तीन जन्मोंकी कथा…