ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
स्कन्ध 7

श्रीमद्भागवतम्सप्तम स्कन्ध

कुल 15 अध्याय

अध्याय 1

नारद-युधिष्ठिर-संवाद और जय-विजयकी कथा

इस अध्याय में परीक्षित्‌ भगवान्‌के समभाव और दैत्योंके वधके विषयमें प्रश्न करते हैं। शुकदेवजी नारद और युधिष्ठिरके संवादका प्रसंग सुनाते हैं, जिसमें शिशुपाल-दन्तवक्त्रकी मुक्ति, वैरभावसे भगवान्‌में तन्मयता और जय-विजयके शापसे तीन जन्मोंकी कथा…

8 मिनट का पाठ1,416 शब्द
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अध्याय 2

हिरण्याक्षका वध होनेपर हिरण्यकशिपुका अपनी माता और कुटुम्बियोंको समझाना

इस अध्याय में हिरण्याक्षके वधसे शोक और क्रोधसे भरे हिरण्यकशिपुका वर्णन है। वह दैत्योंको धर्मकर्मका विनाश करनेकी आज्ञा देता है और फिर अपनी माता दिति तथा सम्बन्धियोंको आत्मतत्त्व, शरीरकी अनित्यता और यमराज-सुयज्ञ प्रसंगके द्वारा शोक त्यागनेका उपदेश देता है।

10 मिनट का पाठ1,985 शब्द
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अध्याय 3

हिरण्यकशिपुकी तपस्या और वरप्राप्ति

इस अध्याय में हिरण्यकशिपुकी घोर तपस्या, देवताओंका ब्रह्माजीसे निवेदन, ब्रह्माजीका हिरण्यकशिपुके पास जाना और उसे वर देनेका प्रसंग है। अन्तमें हिरण्यकशिपु ब्रह्माजीकी स्तुति करके विविध प्रकारसे मृत्युसे बचने, अजेय होने और अक्षय ऐश्वर्य प्राप्…

6 मिनट का पाठ1,161 शब्द
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अध्याय 4

हिरण्यकशिपुके अत्याचार और प्रह्लादके गुणका वर्णन

इस अध्याय में ब्रह्माजीसे वर पाकर हिरण्यकशिपुका ऐश्वर्य, तीनों लोकोंपर उसका अत्याचार, देवताओंका भगवान्‌की शरण जाना और आकाशवाणीका आश्वासन वर्णित है। आगे प्रह्लादजीके दिव्य गुण, भगवान्‌में उनकी स्वाभाविक प्रेममयी तन्मयता और युधिष्ठिरका यह प्र…

7 मिनट का पाठ1,386 शब्द
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अध्याय 5

हिरण्यकशिपुके द्वारा प्रह्लादजीके वधका प्रयत्न

इस अध्याय में प्रह्लादजीकी भगवद्भक्ति, हिरण्यकशिपुका क्रोध, गुरुपुत्रोंका शिक्षण और प्रह्लादजीको मारनेके अनेक निष्फल प्रयत्नोंका वर्णन है।

10 मिनट का पाठ1,815 शब्द
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अध्याय 6

प्रह्लादजीका असुर-बालकोंको उपदेश

इस अध्याय में प्रह्लादजी असुर-बालकोंको मनुष्य-जन्मकी दुर्लभता, गृहासक्तिके बन्धन और भगवान्‌ नारायणकी शरण ग्रहण करनेका उपदेश देते हैं।

6 मिनट का पाठ1,121 शब्द
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अध्याय 7

प्रह्लादजी द्वारा माताके गर्भमें प्राप्त हुए नारदजीके उपदेशका वर्णन

इस अध्याय में प्रह्लादजी असुर-बालकोंको बताते हैं कि किस प्रकार गर्भमें रहते हुए उन्हें देवर्षि नारदसे भागवतधर्म और आत्मज्ञानका उपदेश मिला।

9 मिनट का पाठ1,637 शब्द
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अध्याय 8

नृसिंहभगवान्का प्रादुर्भाव, हिरण्यकशिपुका वध एवं ब्रह्मादि देवताओं द्वारा भगवान्‌की स्तुति

इस अध्याय में प्रह्लादकी रक्षा हेतु नृसिंहभगवान्‌का प्रादुर्भाव, हिरण्यकशिपुका वध और ब्रह्मादि देवताओं द्वारा भगवान्‌की स्तुति वर्णित है।

12 मिनट का पाठ2,234 शब्द
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अध्याय 9

प्रह्लादजीके द्वारा नृसिंहभगवान्‌की स्तुति

इस अध्याय में प्रह्लादजी नृसिंहभगवान्‌की करुणा, महिमा, भक्तियोग और संसारसे जीवोंकी रक्षा के लिये भावपूर्ण स्तुति करते हैं।

14 मिनट का पाठ2,749 शब्द
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अध्याय 10

प्रह्लादजीके राज्याभिषेक और त्रिपुरदहनकी कथा

इस अध्याय में प्रह्लादजीकी निष्काम भक्ति, भगवान्‌के वरदान, उनका राज्याभिषेक, जय-विजयकी कथा और त्रिपुरदहनका प्रसंग वर्णित है।

11 मिनट का पाठ2,004 शब्द
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अध्याय 11

मानवधर्म, वर्णधर्म और स्त्रीधर्मका निरूपण

इस अध्याय में नारदजी युधिष्ठिरको मानवधर्म, वर्णोंके धर्म, आजीविका-वृत्तियाँ और स्त्रीधर्मका निरूपण बताते हैं।

5 मिनट का पाठ912 शब्द
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अध्याय 12

ब्रह्मचर्य और वानप्रस्थ आश्रमोंके नियम

इस अध्याय में नारदजी ब्रह्मचारी और वानप्रस्थ आश्रमोंके नियम, गुरुसेवा, संयम, वानप्रस्थ तप और अन्तमें तत्त्वोंके लयका उपदेश देते हैं।

5 मिनट का पाठ913 शब्द
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अध्याय 13

यतिधर्मका निरूपण और अवधूत-प्रह्लाद-संवाद

इस अध्याय में नारदजी संन्यास और यतिधर्मका निरूपण करते हैं तथा दत्तात्रेय अवधूत और भक्त प्रह्लादके संवादसे वैराग्य और सन्तोषका उपदेश देते हैं।

7 मिनट का पाठ1,397 शब्द
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अध्याय 14

गृहस्थसम्बन्धी सदाचार

इस अध्याय में नारदजी गृहस्थधर्म, संतोष, दान, श्राद्ध, शुभ काल, तीर्थ और सत्पात्रके रूपमें भगवान्‌ तथा ब्राह्मणकी महिमा बताते हैं।

6 मिनट का पाठ1,131 शब्द
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अध्याय 15

गृहस्थोंके लिये मोक्षधर्मका वर्णन

इस अध्याय में नारदजी गृहस्थोंके लिये मोक्षधर्म, श्राद्ध-विधान, संतोष, अधर्मकी शाखाएँ, गुरु-भक्ति, योग-साधना, प्रवृत्ति-निवृत्ति मार्ग और भगवान्‌ श्रीकृष्णकी परम ब्रह्मरूप महिमा बताते हैं।

14 मिनट का पाठ2,602 शब्द
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