ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
स्कन्ध 8

श्रीमद्भागवतम्अष्टम स्कन्ध

कुल 24 अध्याय

अध्याय 1

मन्वन्तरोंका वर्णन

इस अध्याय में परीक्षित्‌के प्रश्नपर श्रीशुकदेवजी प्रारम्भिक मन्वन्तरों, भगवान्‌के यज्ञपुरुष, विभु, सत्यसेन और हरि अवतारों तथा गजेन्द्र-रक्षा प्रसंगके आरम्भका वर्णन करते हैं।

5 मिनट का पाठ944 शब्द
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अध्याय 2

ग्राहके द्वारा गजेन्द्रका पकड़ा जाना

इस अध्याय में त्रिकूट पर्वत, ऋतुमान्‌ उद्यान, वहाँके सरोवर और गजेन्द्रके जलक्रीड़ा करते समय ग्राहके द्वारा पकड़े जानेका वर्णन है। संकटमें पड़े गजेन्द्र अन्ततः भगवान्‌की शरण ग्रहण करनेका निश्चय करता है।

6 मिनट का पाठ1,066 शब्द
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अध्याय 3

गजेन्द्रके द्वारा भगवान्‌की स्तुति और उसका संकटसे मुक्त होना

इस अध्याय में गजेन्द्र संकटमें भगवान्‌की स्तुति करता है, परमात्माके निर्गुण-सगुण स्वरूपका स्मरण करता है और अन्ततः भगवान्‌ श्रीहरि गरुड़पर आकर ग्राहसे गजेन्द्रको मुक्त करते हैं।

8 मिनट का पाठ1,412 शब्द
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अध्याय 4

गज और ग्राहका पूर्वचरित्र तथा उनका उद्धार

इस अध्याय में ग्राहके हूहू गन्धर्व होने, गजेन्द्रके पूर्वजन्ममें इन्द्रद्युम्न राजा होने, अगस्त्यके शाप, भगवान्‌की कृपासे दोनोंके उद्धार और गजेन्द्रस्तुति-स्मरणके फलका वर्णन है।

4 मिनट का पाठ637 शब्द
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अध्याय 5

देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाना और ब्रह्माकृत भगवान्‌की स्तुति

इस अध्याय में रैवत और चाक्षुष मन्वन्तरका वर्णन, समुद्रमन्थनके प्रसंगकी भूमिका, देवताओंकी दुर्दशा, उनका ब्रह्माजीके पास जाना और ब्रह्माजीद्वारा भगवान्‌की स्तुति का वर्णन है।

9 मिनट का पाठ1,658 शब्द
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अध्याय 6

देवताओं और दैत्योंका मिलकर समुद्रमन्थनके लिये उद्योग करना

इस अध्याय में भगवान्‌के देवताओंके सामने प्रकट होने, ब्रह्माजीकी स्तुति, भगवान्‌द्वारा देवताओंको असुरोंसे सन्धि कर समुद्रमन्थनका आदेश देने और मन्दराचलको समुद्रतटतक पहुँचानेका वर्णन है।

7 मिनट का पाठ1,213 शब्द
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अध्याय 7

समुद्रमन्थनका आरम्भ और भगवान्‌ शंकरका विषपान

इस अध्याय में देवताओं और असुरोंद्वारा वासुकिको नेती बनाकर समुद्रमन्थन आरम्भ करने, भगवान्‌के कूर्मरूपसे मन्दराचलको धारण करने, हालाहल विषके प्रकट होने और भगवान्‌ शंकरद्वारा प्रजाकल्याणके लिये विषपान करनेका वर्णन है।

9 मिनट का पाठ1,778 शब्द
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अध्याय 8

समुद्रसे अमृतका प्रकट होना और भगवान्‌का मोहिनी-अवतार ग्रहण करना

इस अध्याय में समुद्रमन्थनसे कामधेनु, उच्चैःश्रवा, ऐरावत, कौस्तुभ, पारिजात, अप्सराएँ, लक्ष्मीजी, वारुणी और धन्वन्तरिका प्रकट होना तथा भगवान्‌के मोहिनी-अवतार ग्रहण करनेका वर्णन है।

7 मिनट का पाठ1,331 शब्द
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अध्याय 9

मोहिनीरूपसे भगवान्‌के द्वारा अमृत बाँटा जाना

इस अध्याय में असुरोंका मोहिनीसे अमृत बाँटनेकी प्रार्थना करना, भगवान्‌का मोहिनीरूपमें देवताओंको अमृत पिलाना, राहुका सिर काटा जाना और भगवान्‌के लिये किये गये कर्मकी महिमा का वर्णन है।

5 मिनट का पाठ979 शब्द
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अध्याय 10

देवासुर-संग्राम

इस अध्याय में अमृतसे वंचित दैत्योंका देवताओंपर आक्रमण, देवासुर-संग्राम, बलिकी आसुरी माया, भगवान्‌का प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा करना और कालनेमि, माली, सुमाली तथा माल्यवान्‌का वध वर्णित है।

8 मिनट का पाठ1,545 शब्द
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अध्याय 11

देवासुर-संग्रामकी समाप्ति

इस अध्याय में भगवान्‌की कृपासे देवताओंका उत्साहित होकर असुरोंसे युद्ध करना, इन्द्र और बलिका संवाद, बलि तथा जम्भासुरका पतन, नमुचिका वध, नारदजीका युद्ध रोकना और शुक्राचार्यद्वारा बलि आदि असुरोंको जीवित करना वर्णित है।

7 मिनट का पाठ1,360 शब्द
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अध्याय 12

मोहिनीरूपको देखकर महादेवजीका मोहित होना

इस अध्याय में भगवान्‌ शंकरका श्रीहरिके मोहिनीरूपका दर्शन करने जाना, भगवान्‌ विष्णुद्वारा मोहिनीरूप दिखाना, महादेवजीका मायासे मोहित होना और अंत में भगवान्‌की मायामहिमा का वर्णन है।

9 मिनट का पाठ1,615 शब्द
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अध्याय 13

आगामी सात मन्वन्तरोंका वर्णन

इस अध्याय में वैवस्वत मन्वन्तरका संक्षिप्त वर्णन, वामनावतारका संकेत और आनेवाले सात मन्वन्तरोंके मनु, देवता, इन्द्र, सप्तर्षि तथा भगवान्‌के अंशावतारोंका वर्णन है।

4 मिनट का पाठ671 शब्द
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अध्याय 14

मनु आदिके पृथक्-पृथक् कर्मोंका निरूपण

इस अध्याय में राजा परीक्षित्‌के प्रश्नके उत्तरमें बताया गया है कि मनु, मनुपुत्र, सप्तर्षि, देवता और इन्द्र भगवान्‌की प्रेरणासे अपने-अपने मन्वन्तरमें विश्व-व्यवस्थाका संचालन करते हैं।

2 मिनट का पाठ275 शब्द
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अध्याय 15

राजा बलिकी स्वर्गपर विजय

इस अध्याय में राजा परीक्षित्‌का वामनावतारसे सम्बन्धित प्रश्न, शुक्राचार्यद्वारा बलिको पुनर्जीवित करना, भृगुवंशियोंकी कृपासे बलिका बल बढ़ना, अमरावतीपर चढ़ाई, देवताओंका स्वर्ग छोड़ना और बलिकी तीनों लोकोंपर विजय का वर्णन है।

6 मिनट का पाठ1,078 शब्द
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अध्याय 16

कश्यपजीके द्वारा अदितिको पयोव्रतका उपदेश

इस अध्याय में देवताओंकी पराजयसे दुःखी अदितिका कश्यपजीसे उपाय पूछना, कश्यपजीका भगवान्‌की शरण और पयोव्रतका उपदेश देना तथा व्रतकी विस्तृत विधि बतायी गयी है।

9 मिनट का पाठ1,640 शब्द
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अध्याय 17

भगवान्‌का प्रकट होकर अदितिको वर देना

इस अध्याय में अदितिका पयोव्रत पूर्ण होना, भगवान्‌का प्रकट होकर अदितिको आश्वासन देना, कश्यपजीके द्वारा भगवान्‌के अंशका अदितिमें आधान और ब्रह्माजीद्वारा भगवान्‌की स्तुति वर्णित है।

5 मिनट का पाठ890 शब्द
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अध्याय 18

वामनभगवान्‌का प्रकट होकर राजा बलिकी यज्ञशालामें पधारना

इस अध्याय में भगवान्‌ वामनका अदितिके गर्भसे प्रकट होना, उनके उपनयन-संस्कार, राजा बलिकी यज्ञशालामें उनका आगमन और बलिके द्वारा उनका स्वागत वर्णित है।

5 मिनट का पाठ955 शब्द
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अध्याय 19

भगवान्‌ वामनका बलिसे तीन पग पृथ्वी माँगना, बलिका वचन देना और शुक्राचार्यजीका उन्हें रोकना

इस अध्याय में भगवान्‌ वामन राजा बलिसे तीन पग भूमि माँगते हैं, बलि उन्हें अधिक दान देनेका आग्रह करते हैं और शुक्राचार्यजी भगवान्‌की लीला पहचानकर बलिको दानसे रोकते हैं।

8 मिनट का पाठ1,444 शब्द
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अध्याय 20

भगवान्‌ वामनजीका विराट्रूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना

इस अध्याय में राजा बलि शुक्राचार्यजीके रोकनेपर भी सत्यसे न डिगकर वामनभगवान्‌को तीन पग भूमि देते हैं और भगवान्‌ विराट्रूप धारण कर दो पगोंमें पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेते हैं।

6 मिनट का पाठ1,024 शब्द
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अध्याय 21

बलिका बाँधा जाना

इस अध्याय में भगवान्‌के चरणका सत्यलोकतक पहुँचना, ब्रह्माजीद्वारा चरणपूजन, असुरोंका युद्ध-प्रयास, बलिद्वारा उन्हें रोकना, गरुड़द्वारा बलिका बाँधा जाना और भगवान्‌का तीसरा पग माँगना वर्णित है।

5 मिनट का पाठ950 शब्द
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अध्याय 22

बलिके द्वारा भगवान्‌की स्तुति और भगवान्‌का उसपर प्रसन्न होना

इस अध्याय में राजा बलि भगवान्‌के सामने सत्यपर अडिग रहते हुए स्तुति करते हैं, प्रह्लादजी और विन्ध्यावली भगवान्‌की शरण लेते हैं, ब्रह्माजी बलिके लिये निवेदन करते हैं और भगवान्‌ बलिको सुतललोक तथा भविष्यमें इन्द्रपदका वर देते हैं।

7 मिनट का पाठ1,279 शब्द
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अध्याय 23

बलिका बन्धनसे छूटकर सुतललोकको जाना

इस अध्याय में बलिका बन्धनसे मुक्त होकर सुतललोक जाना, प्रह्लादजीकी स्तुति, शुक्राचार्यद्वारा यज्ञकी त्रुटि पूरी करना, इन्द्रको स्वर्गराज्य लौटना और वामनभगवान्‌के चरित्रश्रवणकी महिमा कही गयी है।

5 मिनट का पाठ826 शब्द
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अध्याय 24

भगवान्के मत्स्यावतारकी कथा

इस अध्याय में भगवान्के मत्स्यावतार, राजा सत्यव्रतकी रक्षा, प्रलयकालीन नौका, सप्तर्षियोंको उपदेश, हयग्रीवसे वेदोंकी पुनः प्राप्ति और वैवस्वत मनुकी उत्पत्तिका वर्णन है।

9 मिनट का पाठ1,795 शब्द
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