पौ·राणिक
बुधवार — शुभ मुहूर्त
20.3मार्च 2024
अयोध्या · 20 मार्च 2024
ब्रह्म · अभिजित · विजय · गोधूलि · निशिता·सूर्योदय 06:05
अयोध्या
उत्तर प्रदेश
IST · UTC +05:30
01
शुभ मुहूर्त — पाँच प्रमुख अंतराल
ब्रह्म, अभिजित, विजय, गोधूलि और निशिता — दिनभर के पाँच शुभ अंतराल जिनमें नये कार्य का आरंभ श्रेयस्कर माना गया है।
अभिजित मुहूर्त को दिन का सर्वश्रेष्ठ क्षण कहा गया है — परन्तु बुधवार को इसे वर्ज्य माना गया है।
ब्रह्म मुहूर्त
04:29 — 05:16
ध्यान, योग और वेद पाठ के लिए सर्वोत्तम समय
विजय मुहूर्त
14:10 — 14:59
विजय और सफलता के लिए सर्वोत्तम — महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ करें
गोधूलि मुहूर्त
18:11 — 18:36
विवाह और गृह प्रवेश के लिए अत्यंत शुभ — गोधूलि वेला
निशिता मुहूर्त
23:45 — 00:32
अर्धरात्रि का शुभ काल — शिवरात्रि पूजन और रात्रि साधना
02
संध्या एवं अमृत काल
प्रातः व सायं संध्यावंदन के समय — और दिवस में नक्षत्र-आधारित अमृत काल।
संध्या-काल पूजा-पाठ हेतु; अमृत काल नए कार्य आरंभ हेतु शुभ।
संध्या काल
प्रातः · सायं01
प्रातः सन्ध्याप्रातःकालीन संध्यावंदन — सूर्योदय के आसपास
04:54 — 06:05
02
सायाह्न सन्ध्यासंध्यावंदन — सायंकालीन पूजा और संध्या का समय
18:13 — 19:24
अमृत काल
नक्षत्र · चौघड़िया01
अमृत कालनक्षत्र-आधारित शुभ काल
15:36 — 17:22
02
अमृत चौघड़ियादिन का शुभ चौघड़िया
07:36 — 09:07
03
रात्रि अमृतरात्रि का शुभ चौघड़िया
21:10 — 22:39
यमगण्ड
07:36 — 09:07
सरकारी / कानूनी / स्थायी निर्णय टालें।
गुलिक काल
10:38 — 12:09
शुभ आरंभ टालें; दान-तर्पण अनुकूल।
अभिजित मुहूर्त
सूर्य के मध्याह्न के आस-पास का अंश — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल। यात्रा-आरंभ, नये उद्यम, संधि-समझौतों के लिए अति-शुभ। केवल बुधवार को इसे वर्ज्य माना गया है।
ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पूर्व का काल। ध्यान, योग, स्वाध्याय, वेद-पाठ के लिए श्रेष्ठ — शरीर-मन निर्मलता एवं सात्त्विकता का काल।
गोधूलि वेला
सूर्यास्त के समय का अल्प अंश — विवाह, गृह-प्रवेश, सत्संग, संध्या-वंदन हेतु अति-शुभ। शास्त्रीय परंपरा में संक्रमण-काल का "अमृत" क्षण।
अन्य प्रमुख नगरों के शुभ मुहूर्त
गणना
सूर्योदय-सूर्यास्त आधारित · दृक्
अंशदान
दिनमान ÷ 15 · दिन के मुहूर्त 30
समय क्षेत्र
अयोध्या · IST
ॐ तत् सत्