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17 दिसंबर 2025

17 दिसंबर 2025 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

17 दिसंबर 2025 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण त्रयोदशी
नक्षत्र
विशाखा
योग
सुकर्मा
करण
गर
वार
बुधवार
हिन्दू मास
पौष
ऋतु
हेमन्त
सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:27

17 दिसंबर 2025 के लिए प्रश्नोत्तर

बुधवार को कौन से काम शुभ?

बुधवार=बुध(बुद्धि/व्यापार)। सभी कार्य शुभ — व्यापार, दुकान, बैंक, शिक्षा, लेखन, संचार, गृहप्रवेश। कोई विशेष वर्जना नहीं।

गणेश चालीसा पढ़ने की विधि और नियम क्या हैं?

विधि: स्नान → पूर्व/उत्तर मुख → दीपक → सिंदूर, दूर्वा, मोदक → 'ॐ गं गणपतये नमः' 3 बार → चालीसा → आरती। बुधवार/चतुर्थी विशेष। तुलसी वर्जित। 21/40 दिन निरंतर = विशेष फल। फल: विघ्न नाश, बुद्धि, सफलता।

बुधवार को गणेश पूजा करने का क्या विशेष विधान है?

बुधवार = बुद्धि दिवस, गणेश = बुद्धि देवता। विधान: पंचामृत अभिषेक, सिंदूर, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, अथर्वशीर्ष/चालीसा, हरे मूंग प्रसाद। 21 बुधवार व्रत = मनोकामना पूर्ति। फल: बुद्धि, वाक्शक्ति, व्यापार लाभ, बुध शांति।

त्रयोदशी श्राद्ध में गया का क्या महत्व है?

यह गया श्राद्ध जैसा फल देता है।

त्रयोदशी श्राद्ध से पितर कब तक तृप्त रहते हैं?

अनन्त काल तक तृप्ति बताई गई है।

महालय में पुत्रवता निषेध लागू होता है क्या?

नहीं, महालय में लागू नहीं।

पुत्रवान के लिए त्रयोदशी श्राद्ध कब वर्जित है?

सामान्य काम्य श्राद्ध में।

पुत्रवता निषेध क्या है?

पुत्रवान के सामान्य काम्य श्राद्ध का निषेध।

त्रयोदशी श्राद्ध में पंचबलि क्या है?

पांच अंशों को अन्न अर्पण।

त्रयोदशी श्राद्ध में देव तर्पण कैसे करें?

पूर्वमुख होकर।

त्रयोदशी श्राद्ध में उपवास क्यों?

शुद्धता और संयम के लिए।

त्रयोदशी श्राद्ध शाम को कर सकते हैं क्या?

नहीं, शाम को श्राद्ध वर्जित है।

त्रयोदशी श्राद्ध सुबह कर सकते हैं क्या?

नहीं, अपराह्न काल श्रेष्ठ है।

त्रयोदशी श्राद्ध में रोहिण मुहूर्त क्या है?

कुतप के बाद का शुभ श्राद्ध काल।

त्रयोदशी श्राद्ध में कुतप मुहूर्त क्या है?

श्राद्ध का श्रेष्ठ पितृ काल।

त्रयोदशी श्राद्ध में योगी को भोजन कराने का फल क्या है?

हजार ब्राह्मण भोजन से भी श्रेष्ठ।

त्रयोदशी श्राद्ध से ब्रह्मांड कैसे संतुलित होता है?

यह देव-पितृ शक्तियों को संतुष्ट करता है।

त्रयोदशी पर तिल जल का क्या फल है?

हजार वर्षों के श्राद्ध जैसा पुण्य।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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