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15 सितंबर 2026

15 सितंबर 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

15 सितंबर 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल चतुर्थी
नक्षत्र
स्वाति
योग
ऐन्द्र
करण
विष्टि
वार
मंगलवार
हिन्दू मास
भाद्रपद
ऋतु
वर्षा
सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:26

आज के पर्व

पंचमी

15 सितंबर 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

मंगलवार को लाल कपड़ा बांधने से क्या लाभ होता है?

मंगलवार मंगल ग्रह और हनुमान जी का दिन है। लाल कपड़ा बाँधने/पहनने से मंगल दोष शांति, साहस वृद्धि, हनुमान कृपा और बुरी शक्तियों से रक्षा होती है। हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाना विशेष शुभ है।

हनुमान अष्टक पाठ का सही समय

हनुमान अष्टक का पाठ संध्या काल या रात्रि के समय करना सर्वाधिक प्रभावशाली होता है। संकट के समय मंगलवार या शनिवार की रात इसका पाठ अचूक फल देता है।

मंगलवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

स्नान→लाल/केसरिया वस्त्र→दीपक (सरसों तेल)→सिंदूर+तेल→केसरिया चोला→गुड़-चने भोग→हनुमान चालीसा (1-7 बार)→बजरंग बाण→आरती→प्रसाद। 'ॐ हं हनुमते नमः' 108 बार। मांसाहार वर्जित।

पंचमी और चतुर्दशी श्राद्ध में क्या अंतर है?

पंचमी अविवाहित मृत्यु के लिए, चतुर्दशी अकाल मृत्यु के लिए है।

उपनयन के बाद बाल मृत्यु का श्राद्ध कब करें?

उपनयन के बाद बाल मृत्यु का श्राद्ध पंचमी को करें।

अज्ञात तिथि वाले अविवाहित का श्राद्ध कब करें?

अज्ञात तिथि वाले अविवाहित का श्राद्ध पंचमी को करें।

अविवाहित बहन का श्राद्ध कब करें?

अविवाहित बहन का श्राद्ध पंचमी को करें।

अविवाहित भाई का श्राद्ध कब करें?

अविवाहित भाई का श्राद्ध पंचमी को करें।

कुँवारी लड़की का श्राद्ध कब करें?

कुँवारी लड़की का श्राद्ध पंचमी को किया जाता है।

कुँवारे लड़के का श्राद्ध कब करें?

कुँवारे लड़के का श्राद्ध पंचमी को करें।

अविवाहित का श्राद्ध कब करें?

अविवाहित दिवंगत का श्राद्ध पंचमी को करें।

चौथ भरणी क्या होती है?

चतुर्थी पर भरणी नक्षत्र का श्राद्ध चौथ भरणी कहलाता है।

बच्चे की मृत्यु पर श्राद्ध कब करें?

अविवाहित या बाल्यावस्था में मृत बच्चों का श्राद्ध शास्त्रों के अनुसार पंचमी (भरणी पंचमी) या त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। दोनों तिथियाँ शास्त्रों में निर्धारित हैं और कुलाचार के अनुसार इनमें से किसी एक का चयन किया जा सकता है। यह विशेष कोटि के मृतकों के लिए है।

माँ तारा की साधना कब करनी चाहिए?

तारा साधना का शुभ काल: माघ गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन (विशेष शुभ)। अर्धरात्रि = श्रेष्ठ फलदायी। किसी भी शुभ दिन, मंगलवार या शुक्ल पक्ष पंचमी से प्रारंभ।

हरतालिका तीज व्रत क्या है?

हरतालिका तीज = भाद्रपद शुक्ल तृतीया, निर्जला व्रत। कथा: हिमालय ने विष्णु से विवाह तय किया → पार्वती दुखी → सखी ने हरण कर जंगल ले गई → पार्वती ने बालू का शिवलिंग बनाकर रात भर जागरण किया → शिव प्रकट हुए और पत्नी स्वीकार किया।

व्यापार वृद्धि के लिए बटुक भैरव साधना कैसे करें?

व्यापार वृद्धि के लिए: हर मंगलवार संकल्प पूर्वक कुत्तों को लड्डू खिलाएं, बटुक भैरव यंत्र स्थापित करें और नित्य एक माला जाप करें।

कुत्तों को लड्डू खिलाने से क्या होता है?

भैरव का वाहन श्वान (कुत्ता) है — हर मंगलवार को लड्डू कुत्तों को खिलाने से भैरव की कृपा और व्यापार वृद्धि होती है।

बटुक भैरव साधना किस दिन शुरू करनी चाहिए?

बटुक भैरव साधना किसी भी मंगलवार या कालाष्टमी (मंगल विशेष अष्टमी) के दिन शुरू करनी चाहिए।

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पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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