अथर्ववेद में जल को देवी स्वरूप और रोगनाशक माना। शुद्धि विधियाँ: उबालना, सूर्यप्रकाश, तुलसी, ताँबे का पात्र, कुश घास — इन सभी के पीछे आधुनिक विज्ञान ने एंटीमाइक्रोबियल गुण सिद्ध किए हैं।
- 1उबालना — ग्रंथों में दूषित जल को 'पकाकर' शुद्ध करने का उल्लेख है।
- 2धूप में रखना — सूर्यप्रकाश से जल शुद्धि — UV radiation का प्राचीन रूप।
- 3तुलसी — जल में तुलसी डालने से रोगाणु नष्ट होते हैं — आधुनिक विज्ञान ने इसमें यूजिनॉल जैसे एंटीमाइक्रोबियल तत्व खोजे हैं।
- 4ताँबे का पात्र — ताँबे के बर्तन में जल रखना — आधुनिक अध्ययनों ने सिद्ध किया है कि ताँबे में ओलिगोडायनेमिक (oligodynamic) प्रभाव होता है जो हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करता है।
- 5कुश घास — जल को कुश (Desmostachya bipinnata) से शुद्ध करना — शोधकर्ताओं ने इसमें कुछ antimicrobial गुण पाए हैं।
- 6अग्निस्पर्श — हवन-कुंड के समीप रखे जल में धुएँ के तत्व मिलकर उसे शुद्ध करते हैं — कुछ वैज्ञानिकों ने अग्निहोत्र के धुएँ में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए हैं।