लोकप्रेत कुछ खा-पी क्यों नहीं सकता?प्रेत के पास मुख, गला और आमाशय वाला स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए वह भूख-प्यास होने पर भी खा-पी नहीं सकता।#प्रेत#भूख प्यास#वायव्य शरीर
लोकप्रेत को भूख-प्यास क्यों लगती है?प्रेत को सूक्ष्म शरीर में भूख-प्यास का अनुभव रहता है, पर भौतिक शरीर न होने से वह अन्न-जल ग्रहण नहीं कर पाता।#प्रेत भूख प्यास#प्रेत योनि#अतृप्ति
जीवन एवं मृत्युश्राद्ध न करने से पितरों की क्या स्थिति होती है?श्राद्ध न करने पर — पितर भूखे-प्यासे लौटते हैं, शाप देते हैं, वंशजों को पितृदोष लगता है, प्रेत कल्पान्त तक भटकता है। 'श्राद्ध न करने वाला पितृघातक है' — गरुड़ पुराण की यही चेतावनी है।#श्राद्ध#पितर#अतृप्ति
आत्मा और मोक्षप्रेत योनि क्या है और कोई प्रेत कैसे बनता हैप्रेत योनि = शरीर छूटा पर अगली गति नहीं मिली। कारण: अंत्येष्टि न होना, अतृप्त इच्छाएं, अकाल मृत्यु, आत्महत्या, अत्यधिक पाप। मुक्ति: विधिवत अंत्येष्टि, गया पिंडदान, गरुड़ पुराण पाठ, नारायण बलि। मूल कारण — आसक्ति (गीता 2.62-63)।#प्रेत योनि#भूत-प्रेत#अतृप्ति