मंदिर दानमंदिर में अन्नदान करने का शास्त्रीय विधान क्या है?
अन्नदान = सर्वश्रेष्ठ दान ('अन्नदानं परं दानम्')। अन्न = ब्रह्म (उपनिषद)। विधि: संकल्प → शुद्ध सात्विक भोजन → भूखे/निर्धन/मंदिर रसोई को। श्रद्धा-सम्मान से, बासी नहीं। प्रतिदिन सर्वोत्तम। भंडारा सेवा = श्रम-दान। गीता: अन्नदान न करना = 'चोरी'।
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