शिव महिमाशिव के माथे पर अर्धचंद्र क्यों होता है?शिव के माथे पर अर्धचंद्र इसलिए है क्योंकि उन्होंने दक्ष के श्राप से ग्रस्त चंद्रमा की रक्षा करके उन्हें अपने मस्तक पर स्थान दिया। समुद्र मंथन के हलाहल विष की गर्मी को शांत करने के लिए भी चंद्रमा को मस्तक पर धारण किया गया।#शिव चंद्रमा#अर्धचंद्र#चंद्रशेखर
परिचय और स्वरूपमाँ मातंगी का स्वरूप कैसा है?माँ मातंगी स्वरूप: वर्ण = श्याम (काला/गहरा नीला) या हरा। मस्तक पर अर्धचंद्र। हाथों में वीणा, खोपड़ी, तलवार, पाश, अंकुश, गन्ने का धनुष और पुष्प बाण। तोते अत्यंत प्रिय — अक्सर तोते के साथ चित्रित।
नवदुर्गामाँ चंद्रघंटा का क्या स्वरूप और संदेश है?माँ चंद्रघंटा = तृतीय स्वरूप (तीसरा दिन)। मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र, रणचंडी रूप। संदेश: दानवों और आसुरी प्रवृत्तियों से निर्भय होकर लड़ने की तत्परता।#चंद्रघंटा#तृतीय दिन#रणचंडी