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उपनयन संस्कार से जुड़े सभी प्रश्न(3)

उपनयन संस्कार पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

संस्कार एवं परम्परा

जनेऊ धारण मंत्र क्या है?

जनेऊ धारण करते समय 'यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥' मंत्र पढ़ा जाता है, जिसका अर्थ है — यह परम पवित्र और आयुवर्धक यज्ञसूत्र मैं धारण करता हूँ, इससे मुझे बल और तेज मिले।

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हिंदू संस्कार एवं परंपरा

जनेऊ के तीन सूत्र किसके प्रतीक हैं विस्तार

जनेऊ के तीन सूत्र त्रिमूर्ति (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) के प्रतीक हैं; देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक हैं; सत्व-रज-तम के प्रतीक हैं; और गायत्री मंत्र के तीन चरणों के प्रतीक हैं।

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वैदिक संस्कार

उपनयन संस्कार यज्ञोपवीत कैसे होता है?

उपनयन = गुरु के निकट ले जाना। ब्राह्मण 8, क्षत्रिय 11, वैश्य 12 वर्ष। विधि: मुंडन → हवन → तीन सूत्र जनेऊ धारण → गायत्री दीक्षा → दण्ड धारण → भिक्षा चर्या। तीन लड़ = गायत्री त्रिपदा। गृहस्थ छह सूत्र। यज्ञोपवीत आजीवन।

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