मंत्र साधनामंत्र जप से पहले आसन शुद्धि कैसे करें?आसन शुद्धि: स्वच्छ शांत स्थान → गंगाजल/गोमूत्र छिड़काव → कुश/ऊनी/रेशमी आसन → 'ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका...' मंत्र → 3 बार जल छिड़क → अक्षत रखें। कुश=ग्रह शांति, ऊनी=ध्यान, रेशम=सिद्धि। व्यक्तिगत, निश्चित आसन।#आसन शुद्धि#पूजा आसन#कुश
पूजा विधिपूजा में कौन सा आसन उपयोग करें?पूजा में आसन: कुश आसन — सर्वोत्तम (वैदिक परंपरा)। ऊनी आसन — सामान्य पूजा। लाल कपड़ा — शक्ति पूजा। काला कंबल — शिव/काली। भूमि पर सीधे न बैठें। एक ही आसन नित्य उपयोग करें — सिद्ध होता है। गीता 6.11: शुद्ध स्थान पर, स्थिर आसन।#आसन
मंत्र जप नियममंत्र जप में ऊनी आसन का क्या महत्व है?ऊन = विद्युत कुचालक → ऊर्जा भूमि में नहीं जाती। गीता: 'चैलाजिनकुशोत्तरम्' — कुश+मृगछाला+वस्त्र। क्रम: कुश > मृगछाला > ऊनी > रेशम > कपास। भूमि पर सीधे नहीं।#ऊनी#आसन#महत्व