लोकमहर्लोक के ऊपर कौन से लोक हैं?महर्लोक के ऊपर जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक (ब्रह्मलोक) हैं। ये तीनों अकृतक अर्थात नित्य-अविनाशी लोक हैं।#महर्लोक#जनलोक#तपोलोक
कुंडलिनीतंत्र में कुंडलिनी ऊर्जा ऊपर उठते समय क्या लक्षण दिखते हैं?ज्योति per चक्र: मूलाधार=अग्नि, स्वाधिष्ठान=प्रवाल, मणिपुर=विद्युत, अनाहत=लिंग, विशुद्ध=श्वेत, आज्ञा=धूम्र, सहस्रार=परशु। सामान्य: रीढ़ विद्युत, कंपन, रोना/हंसना, नाद, प्रकाश।#कुंडलिनी#लक्षण#ऊपर
लोकसत्यलोक के ऊपर क्या है?सत्यलोक के ऊपर 2,62,00,000 योजन की दूरी पर शाश्वत वैकुंठ लोक है जो भौतिक ब्रह्मांड की सीमा के पार, प्रलय से मुक्त और सनातन है।#सत्यलोक#वैकुंठ#ऊपर
कुंडलिनीध्यान में कुंडलिनी शक्ति सर्प की तरह ऊपर चढ़ने का अनुभव कैसा होता है?लहरदार/सर्पिल (रीढ़), 'बिजली कौंधना' (अमर उजाला)। Per चक्र ज्योति। सहस्रार=प्रकाश+परमानंद। बिना गुरु=खतरनाक!#कुंडलिनी#सर्प#ऊपर