दिव्यास्त्रवरुण देव कौन हैं?वरुण देव जल के अधिपति, ऋतु के संरक्षक और सत्य के प्रतीक हैं। वे पश्चिम दिशा के लोकपाल हैं और उनका वाहन मकर (मगरमच्छ) है।#वरुण देव#जल अधिपति#पश्चिम दिशा
लोकआकाशगंगाएँ फिर कैसे स्थिर हुईं?ब्रह्मांडीय नियम लौटने से आकाशगंगाएँ फिर स्थिर हुईं।#आकाशगंगा#गुरुत्व#ऋत
लोकमहामाया ने हस्तक्षेप क्यों किया?अकाल पतन रोकने के लिए महामाया ने हस्तक्षेप किया।#महामाया#हस्तक्षेप#ऋत
लोकब्रह्मांडीय ऋत कैसे चलता है?यह महाविष्णु की श्वास और महामाया के स्पंदन से चलता है।#ऋत#महाविष्णु#श्वास
वेद ज्ञानवेदों में धर्म का अर्थ क्या है?वेदों में धर्म का मूल रूप 'ऋत' है — ब्रह्मांडीय सत्य-व्यवस्था जिसे वरुण देव संरक्षित करते हैं। 'धारयति इति धर्मः' — जो धारण करे, वह धर्म। मनुस्मृति (2/6) — 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है।#धर्म#वेद#ऋत
वेद ज्ञानवेदों में प्रकृति का महत्व क्या है?वेदों में प्रकृति देव-स्वरूप है। अथर्ववेद (12/1) का पृथ्वी सूक्त — 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः' — पृथ्वी को माता मानता है। ऋग्वेद में जल, वायु, सूर्य की स्तुति है। 'ऋत' की रक्षा वैदिक पर्यावरण-दर्शन का मूल है।#प्रकृति#वेद#पृथ्वी