पूजा विधि एवं कर्मकांडआचमन का मंत्र क्या है?आचमन में तीन बार जल ग्रहण करते हुए क्रमशः 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः', 'ॐ माधवाय नमः' बोला जाता है। इससे पूर्व 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...' मंत्र से पवित्रीकरण होता है। यह पूजा आरंभ की अनिवार्य शुद्धि-क्रिया है।#आचमन मंत्र#पूजा विधि#शुद्धि मंत्र
पूजा एवं अनुष्ठानषोडशोपचार पूजा में 16 उपचार कौन सेषोडशोपचार के 16 उपचार हैं — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, आरती और मंत्रपुष्पांजलि-प्रदक्षिणा।#षोडशोपचार#16 उपचार
पूजा एवं अनुष्ठानसंकल्प में गोत्र बोलना क्यों जरूरीसंकल्प में गोत्र बोलना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे देवताओं और पितरों को ज्ञात होता है कि किस ऋषि-वंश का व्यक्ति यह अनुष्ठान कर रहा है — यही संकल्प की पूर्णता का आधार है।#संकल्प#गोत्र#पूजा विधि
भक्ति एवं पूजाभक्ति में कर्मकांड जरूरी या प्रेम पर्याप्तकर्मकांड — अनुशासन और ढांचा देता। प्रेम — गीता 9.26, मीरा, कबीर 'ढाई आखर प्रेम।' सत्य — कर्मकांड सीढ़ी है, प्रेम मंजिल। शुरुआत कर्मकांड, लक्ष्य प्रेम। प्रेम बिना कर्मकांड खोखला।#भक्ति#कर्मकांड#प्रेम
वैदिक कर्मकांडआधुनिक युग में वैदिक कर्मकांड कैसे प्रासंगिक हैं?प्रासंगिकता: मानसिक स्वास्थ्य (ध्यान/जप=meditation, WHO अनुशंसित), पर्यावरण (हवन=वायु शुद्धि, गोसेवा), सामाजिक (16 संस्कार), नैतिकता (सत्य-अहिंसा-दान), वैज्ञानिक (योग-आयुर्वेद=विश्व स्वीकृत)। अनुकूलन: सार ग्रहण, 10 मिनट पर्याप्त।#आधुनिक#प्रासंगिकता#वैदिक
वेद एवं यज्ञयज्ञ में यजुर्वेद के मंत्रों का प्रयोग कैसे होता हैयजुर्वेद = कर्मकाण्ड का वेद, अध्वर्यु (यज्ञ कर्ता) का। प्रयोग: अग्नि प्रज्वलन, आहुति ('ॐ अग्नये स्वाहा'), संस्कार मंत्र (विवाह, अन्त्येष्टि)। प्रसिद्ध: गायत्री (36.3), महामृत्युंजय (3.60), पुरुष सूक्त। गद्यात्मक शैली — क्रिया के स्पष्ट निर्देश। आज भी संस्कारों में सर्वाधिक प्रयुक्त।#यजुर्वेद#यज्ञ#अध्वर्यु