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कृतकाकृतक से जुड़े सभी प्रश्न(7)

कृतकाकृतक पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 7 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

'कृतक', 'अकृतक' और 'कृतकाकृतक' लोकों में क्या अंतर है?

कृतक लोक (त्रैलोक्य) विनाशी हैं, अकृतक (जनलोक से सत्यलोक तक) नित्य हैं। महर्लोक कृतकाकृतक है — नैमित्तिक प्रलय में भस्म नहीं होता पर निर्जन हो जाता है।

#कृतक#अकृतक#कृतकाकृतक
लोक

नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक की क्या स्थिति होती है?

नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता (अकृतक) पर संकर्षण की अग्नि के ताप से निर्जन हो जाता है (कृतक)। भृगु आदि ऋषि जनलोक चले जाते हैं। यही कृतकाकृतक प्रकृति है।

#नैमित्तिक प्रलय#महर्लोक#कृतकाकृतक
लोक

महर्लोक की 'कृतकाकृतक' प्रकृति का क्या अर्थ है?

कृतकाकृतक = आंशिक रूप से विनाशी (कृतक) + आंशिक रूप से अविनाशी (अकृतक)। नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता पर निर्जन हो जाता है — यही इसकी मिश्र प्रकृति है।

#कृतकाकृतक#महर्लोक#विष्णु पुराण
लोक

महर्लोक को 'कृतकाकृतक' क्यों कहते हैं?

कृतकाकृतक = आंशिक रूप से विनाशी + आंशिक रूप से अविनाशी। नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता (अकृतक) पर निर्जन हो जाता है (कृतक)।

#कृतकाकृतक#महर्लोक#विष्णु पुराण
लोक

त्रैलोक्य और महर्लोक में क्या अंतर है?

त्रैलोक्य (भूः, भुवः, स्वः) कृतक अर्थात विनाशशील है और सकाम कर्मों का फल-भोग क्षेत्र है। महर्लोक कृतकाकृतक है — आंशिक रूप से अविनाशी और विशुद्ध तपोमयी लोक।

#त्रैलोक्य#महर्लोक#कृतक
लोक

महर्लोक को कृतकाकृतक क्यों कहा जाता है?

महर्लोक सीधे जलता नहीं, पर प्रलय का ताप वहाँ तक पहुँचता है, इसलिए वह कृतकाकृतक कहलाता है।

#महर्लोक#कृतकाकृतक#प्रलय
लोक

कृतकाकृतक लोक क्या होता है?

कृतकाकृतक लोक वह है जो सीधे नष्ट नहीं होता, पर प्रलय के ताप से निवास योग्य नहीं रहता; महर्लोक ऐसा लोक है।

#कृतकाकृतक#महर्लोक#प्रलय
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