ध्यान अनुभवध्यान में ईश्वर के साथ एकत्व का अनुभव कैसा होता है?'अहं ब्रह्मास्मि' = अनुभव। सर्वत्र ईश्वर (सब=एक=मैं)। अनंत प्रेम, शांति, आनंद अश्रु, शब्दहीन। 'तत् त्वम् असि' (छांदोग्य)। 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म।' दुर्लभ → स्थिर=जीवनमुक्ति।#ईश्वर#एकत्व#अनुभव
ध्यान अनुभवध्यान में मोक्ष का अनुभव कैसा होता है?'मैं' विलुप्त, सर्वव्यापी, सत्-चित्-आनंद, भय शून्य। मुंडक: 'ब्रह्मविद् ब्रह्म भवति।' 'कुछ नहीं बदला+सब बदला।' जीवनमुक्ति: 'कमल=कीचड़ में, जल नहीं छूता।'#मोक्ष#अनुभव#कैसा
ध्यान अनुभवध्यान में निर्विकल्प समाधि का अनुभव कैसा होता है?'मैं' शून्य, विषय-वस्तु-ज्ञाता=एक, अनंत, सत्-चित्-आनंद, शब्दातीत। पतंजलि: 'द्रष्टा स्वरूप स्थित।' 1 क्षण = कृतार्थ। स्थिर = अत्यंत दुर्लभ (रामकृष्ण)।#निर्विकल्प#समाधि#अनुभव