वेद एवं उपनिषदयजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद में क्या फर्क है?यजुर्वेद की दो शाखाएँ हैं। कृष्ण यजुर्वेद में मंत्र और उनकी व्याख्या एक साथ मिली हुई है — तैत्तिरीय संहिता इसकी मुख्य शाखा है। शुक्ल यजुर्वेद में मंत्र और ब्राह्मण अलग-अलग हैं — इसका शतपथ ब्राह्मण अत्यंत प्रसिद्ध है।#यजुर्वेद#कृष्ण यजुर्वेद#शुक्ल यजुर्वेद
शास्त्र ज्ञानउपनिषद में ब्रह्मांड का वर्णन कैसे है?उपनिषदों में ब्रह्मांड ब्रह्म से उत्पन्न है। छान्दोग्य (6/2/1) — आरंभ में एकमात्र 'सत्' था, उससे तेज-जल-पृथ्वी की सृष्टि हुई। तैत्तिरीय (2/1-6) में ब्रह्म → आकाश → वायु → अग्नि → जल → पृथ्वी का सृष्टि-क्रम है। 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म' — यह सम्पूर्ण जगत ब्रह्म ही है।
सुभाषितअतिथि देवो भव का अर्थ?तैत्तिरीय(1.11.2): माता/पिता/गुरु/अतिथि=देवता। 'अतिथि'='अ-तिथि'=बिना तिथि आने वाला। अतिथि सेवा=ईश्वर सेवा। भारतीय संस्कृति 4 स्तंभ। Incredible India नारा भी।#अतिथि देवो भव#तैत्तिरीय#अर्थ