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त्रैलोक्य से जुड़े सभी प्रश्न(5)

त्रैलोक्य पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

मार्कण्डेय पुराण में महर्लोक का वर्णन कैसे है?

मार्कण्डेय पुराण में वर्णन है — नैमित्तिक प्रलय में त्रैलोक्य के निवासी महर्लोक की ओर भागते हैं पर महर्लोक के ऋषि स्वयं जनलोक जाते हैं। एकार्णव से महर्लोक अपनी ऊँचाई से बचता है।

#मार्कण्डेय पुराण#महर्लोक#एकार्णव
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सात सूर्य कब प्रकट होते हैं?

नैमित्तिक प्रलय में भगवान सूर्य की किरणें सात प्रचंड सूर्यों में विभक्त हो जाती हैं जो त्रैलोक्य को जलाती हैं। पहले सौ वर्षों का सूखा और फिर सात सूर्यों का दाह होता है।

#सात सूर्य#नैमित्तिक प्रलय#त्रैलोक्य
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त्रैलोक्य और महर्लोक में क्या अंतर है?

त्रैलोक्य (भूः, भुवः, स्वः) कृतक अर्थात विनाशशील है और सकाम कर्मों का फल-भोग क्षेत्र है। महर्लोक कृतकाकृतक है — आंशिक रूप से अविनाशी और विशुद्ध तपोमयी लोक।

#त्रैलोक्य#महर्लोक#कृतक
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महर्लोक के नीचे कौन से लोक हैं?

महर्लोक के नीचे त्रैलोक्य है — भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक। ये तीनों कृतक अर्थात विनाशशील लोक हैं जो नैमित्तिक प्रलय में नष्ट हो जाते हैं।

#महर्लोक#स्वर्लोक#भुवर्लोक
लोक

मार्कण्डेय पुराण में ॐ और त्रैलोक्य का समन्वय कैसे किया गया है?

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार ॐ के 'अ' = भूलोक, 'उ' = भुवर्लोक और 'म' = स्वर्लोक। भुवर्लोक परब्रह्म का मध्यवर्ती कंपन है, कोई अलग इकाई नहीं।

#मार्कण्डेय पुराण#ॐ#त्रैलोक्य
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