विस्तृत उत्तर
महर्लोक के नीचे तीन ऊर्ध्व लोक स्थित हैं जिन्हें सामूहिक रूप से त्रैलोक्य कहा जाता है। ये तीन लोक क्रमशः भूर्लोक (पृथ्वी), भुवर्लोक (अंतरिक्ष) और स्वर्लोक (स्वर्ग) हैं। इन तीनों लोकों को कृतक कहा जाता है अर्थात ये पूर्णतः भौतिक, सकाम कर्मों के फलों से आबद्ध और विनाशशील हैं। ब्रह्मा के दिन की समाप्ति पर होने वाले नैमित्तिक प्रलय के समय ये तीनों लोक पूरी तरह से भस्म और जलमग्न होते हैं। पृथ्वी के नीचे अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल नामक सात अधोलोक भी हैं जहाँ आसुरी शक्तियों, नागों और भौतिक ऐश्वर्यों का साम्राज्य है।
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