तुलसी विवाह परिचयतुलसी विवाह क्यों किया जाता है?तुलसी विवाह = जीवात्मा (तुलसी/भक्त) का परमात्मा (शालिग्राम/विष्णु) के साथ शाश्वत आध्यात्मिक मिलन। सती वृंदा के वरदान की स्मृति में प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी को संपन्न होता है। यह भक्ति, पवित्रता और समर्पण का प्रतीक है।#तुलसी विवाह#शालिग्राम#देवउठनी एकादशी
पर्व एवं त्योहारतुलसी विवाह कब और कैसे होता है?तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को होता है। इस दिन तुलसी का गन्ने के मंडप में श्रृंगार कर, शालिग्राम शिला से विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया जाता है। इसका पुण्य कन्यादान के समान माना गया है।
पूजा विधितुलसी विवाह कब और कैसे करें?तुलसी विवाह: कार्तिक शुक्ल द्वादशी (देवउठनी एकादशी भी)। विधि: तुलसी-शालिग्राम स्नान-श्रृंगार → मण्डप → कन्यादान → सात फेरे → 'ॐ तुलस्यै नमः' जाप → आरती-भोग → दान। विवाह मुहूर्तों की शुरुआत। कन्यादान तुल्य पुण्य।#तुलसी विवाह#शालिग्राम#कार्तिक मास