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देवता वस्त्र से जुड़े सभी प्रश्न(3)

देवता वस्त्र पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पूजा विधि एवं कर्मकांड

पूजा में वस्त्र अर्पित करने का विधान

वस्त्र अर्पण षोडशोपचार का सातवाँ उपचार है। स्नान के बाद देवताओं को जनेऊ और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। 'श्री [देवता] नमः वस्त्रं समर्पयामि' मंत्र से स्वच्छ कपड़े का प्रतीकात्मक अर्पण भी स्वीकार्य है।

#वस्त्र अर्पण#देवता वस्त्र#षोडशोपचार
मंदिर दान

मंदिर में वस्त्र दान करने का क्या महत्व है?

वस्त्र दान = महापुण्य (पद्मपुराण)। दो प्रकार: देवता को अर्पण (षोडशोपचार अंग) + निर्धन को (लज्जा-रक्षा = परम पुण्य)। नवीन-स्वच्छ दें, फटे/मैले नहीं। संक्रांति, ग्रहण, श्राद्ध — विशेष शुभ। फल: सौन्दर्य, यश, लक्ष्मी कृपा, पितर तृप्ति।

#वस्त्र दान#वस्त्र अर्पण#देवता वस्त्र
मंदिर पूजा

मंदिर में भगवान के वस्त्र बदलने का क्या नियम है?

दैनिक 2-3 बार: प्रातः (सादे) → श्रृंगार (भव्य) → शयन (हल्के)। रेशम = सर्वोत्तम। रंग: विष्णु=पीला, शिव=श्वेत/भगवा, देवी=लाल। ऋतु अनुसार (ग्रीष्म=हल्के, शीत=ऊनी)। केवल दीक्षित पुजारी। पुराने वस्त्र = निर्माल्य (भक्तों को प्रसाद)। घर: साप्ताहिक/त्योहार पर।

#वस्त्र परिवर्तन#अलंकार#श्रृंगार
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