मंदिर ज्ञानमंदिर में देवता के अलग-अलग दर्शन (सुबह/दोपहर/शाम) का क्या अर्थ है?मंगला(जागरण), श्रृंगार(राजा), ग्वाल(कृष्ण), राजभोग(भोजन), उत्थापन(विश्राम बाद), संध्या(दरबार), शयन(अंतिम)। भगवान=जीवित=24घंटे सेवा। नाथद्वारा=8 झांकी।#दर्शन#सुबह#दोपहर
स्तोत्र एवं पाठराजभोग आरती किसे कहते हैंदोपहर (~11-12:30); भगवान को राजसी भोजन (56 भोग/छप्पन भोग विशेष)। 5 आरती में 3rd। कृष्ण भक्ति=छप्पन भोग (गोवर्धन)। घर=दोपहर भोग अर्पित।#राजभोग#आरती#भोग
मुहूर्तअभिजित मुहूर्त क्या है और कब होता हैदिन का 8वां मुहूर्त; ~48 min; दोपहर ~11:36-12:24 (स्थान अनुसार)। दोष नाशक, राम-कृष्ण जन्म मुहूर्त। प्रतिदिन (बुधवार छोड़कर)। दक्षिण यात्रा वर्जित। सबसे सरल — पंचांग न हो तो ~12 बजे शुभ कार्य।#अभिजित#मुहूर्त#दोपहर
श्राद्ध एवं पितृ कर्मश्राद्ध करने का समय दोपहर में या शाम कोकुतप काल (दोपहर ~11:36-12:24) = सर्वोत्तम। अपराह्ण (दोपहर-सूर्यास्त) = स्वीकार्य। प्रातः/रात = वर्जित। पितरों का समय = दोपहर/अपराह्ण। व्यावहारिक: 11-2 बजे।#श्राद्ध#समय#दोपहर