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दोपहर से जुड़े सभी प्रश्न(4)

दोपहर पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मंदिर ज्ञान

मंदिर में देवता के अलग-अलग दर्शन (सुबह/दोपहर/शाम) का क्या अर्थ है?

मंगला(जागरण), श्रृंगार(राजा), ग्वाल(कृष्ण), राजभोग(भोजन), उत्थापन(विश्राम बाद), संध्या(दरबार), शयन(अंतिम)। भगवान=जीवित=24घंटे सेवा। नाथद्वारा=8 झांकी।

#दर्शन#सुबह#दोपहर
स्तोत्र एवं पाठ

राजभोग आरती किसे कहते हैं

दोपहर (~11-12:30); भगवान को राजसी भोजन (56 भोग/छप्पन भोग विशेष)। 5 आरती में 3rd। कृष्ण भक्ति=छप्पन भोग (गोवर्धन)। घर=दोपहर भोग अर्पित।

#राजभोग#आरती#भोग
मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त क्या है और कब होता है

दिन का 8वां मुहूर्त; ~48 min; दोपहर ~11:36-12:24 (स्थान अनुसार)। दोष नाशक, राम-कृष्ण जन्म मुहूर्त। प्रतिदिन (बुधवार छोड़कर)। दक्षिण यात्रा वर्जित। सबसे सरल — पंचांग न हो तो ~12 बजे शुभ कार्य।

#अभिजित#मुहूर्त#दोपहर
श्राद्ध एवं पितृ कर्म

श्राद्ध करने का समय दोपहर में या शाम को

कुतप काल (दोपहर ~11:36-12:24) = सर्वोत्तम। अपराह्ण (दोपहर-सूर्यास्त) = स्वीकार्य। प्रातः/रात = वर्जित। पितरों का समय = दोपहर/अपराह्ण। व्यावहारिक: 11-2 बजे।

#श्राद्ध#समय#दोपहर
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