ध्यान साधनाध्यान में साक्षी भाव क्या होता है?देखना — भाग नहीं लेना। विचार/भावना/शरीर=देखो→जाने दो। मुंडक: '2 पक्षी — 1 खाता, 1 देखता=आत्मा।' गीता: 'उपद्रष्टा।' ध्यान+दैनिक=सबसे शक्तिशाली।#साक्षी#भाव#क्या
वेद ज्ञानवेदों में ऋषियों का क्या स्थान है?वेदों में ऋषि मंत्रों के द्रष्टा (मंत्रद्रष्टा) हैं — रचयिता नहीं। निरुक्त (2/11) कहता है — 'ऋषयो मन्त्रद्रष्टारः।' विश्वामित्र, वशिष्ठ, अत्रि, भरद्वाज आदि सप्तर्षि वैदिक ज्ञान को मनुष्य-लोक तक ले आए।#ऋषि#वेद#द्रष्टा
ध्यान साधनाध्यान में द्रष्टा और दृश्य का भेद कैसे अनुभव करें?पतंजलि (2.17): 'द्रष्टा+दृश्य भेद=मुक्ति।' विचार/शरीर/भावना=दृश्य। 'कौन देख रहा?'=मैं=द्रष्टा=आत्मा। रमण: 'मैं कौन?'=शरीर/मन/बुद्धि नहीं=**द्रष्टा।**#द्रष्टा#दृश्य#भेद