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नासदीय सूक्त से जुड़े सभी प्रश्न(3)

नासदीय सूक्त पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

वेद एवं शास्त्र

नासदीय सूक्त क्या है ऋग्वेद में?

नासदीय सूक्त ऋग्वेद (१०।१२९) का दार्शनिक सूक्त है जिसमें ७ मन्त्रों में सृष्टि-पूर्व की अवस्था का वर्णन है। उस समय न सत् था, न असत् — केवल तमस था। पहले 'काम' उत्पन्न हुआ और सृष्टि आरम्भ हुई। यह विश्व-साहित्य में सृष्टि-रहस्य पर सबसे पुरानी दार्शनिक रचना है।

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सृष्टि विज्ञान

वेदों में ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?

वेदों में सृष्टि के तीन दृष्टिकोण हैं — नासदीय सूक्त (10/129) दार्शनिक रहस्य-वर्णन, हिरण्यगर्भ सूक्त (10/121) ईश्वर-केन्द्रित सृष्टि और पुरुषसूक्त (10/90) यज्ञात्मक सृष्टि। सबका सार — सृष्टि एक ही परम तत्त्व 'तदेकम्' से प्रकट हुई।

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सृष्टि विज्ञान

ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ?

ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (10/129) के अनुसार सृष्टि से पहले न सत था, न असत — एकमात्र परम सत्ता थी जिसकी 'काम' (संकल्प) से सृष्टि हुई। पुराणों में भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्मा प्रकट होकर सृष्टि के रचयिता बने। वेदांत के अनुसार ब्रह्म की माया-शक्ति से यह सृष्टि प्रकट हुई।

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