परिचय और स्वरूपमाँ तारा को 'नील सरस्वती' और 'उग्रतारा' क्यों कहते हैं?'नील सरस्वती' = नील वर्ण + ज्ञान और वाणी की शक्ति (सरस्वती का तांत्रिक नील स्वरूप)। 'उग्रतारा' = भक्तों के कष्टों का हरण करने के लिए उग्र रूप धारण करने वाली।#नील सरस्वती#उग्रतारा#नील वर्ण
परिचय और स्वरूपमाँ तारा कौन हैं — दस महाविद्याओं में इनका क्या स्थान है?माँ तारा = दस महाविद्याओं में द्वितीय स्थान। नील वर्ण = 'नील सरस्वती'। उग्र रूप = 'उग्रतारा'। ज्ञान, वाणी और विपत्तियों से तारने वाली शक्ति। साधना = ज्ञान (नील सरस्वती) + उग्र शक्ति (उग्रतारा) का संगम।
दिव्य स्वरूप और प्रतीकविष्णु का नील वर्ण क्यों है?नील वर्ण = 'नील मेघ श्याम'। नीला = आकाश और महासागर का रंग — अनंत, असीम, अपरिभाषित। विष्णु भी देश-काल-वस्तु की सीमाओं से परे अनंत-सर्वव्यापक हैं। शास्त्रों में 'सर्व वर्ण' — विश्व के समस्त रंगों का समावेश इसी एक अनंत रंग में।#नील वर्ण#अनंत सर्वव्यापी#सर्व वर्ण