दिव्यास्त्रवरुण देव कौन हैं?वरुण देव जल के अधिपति, ऋतु के संरक्षक और सत्य के प्रतीक हैं। वे पश्चिम दिशा के लोकपाल हैं और उनका वाहन मकर (मगरमच्छ) है।#वरुण देव#जल अधिपति#पश्चिम दिशा
पूजा विधानउच्छिष्ट मातंगी साधना की विधि क्या है?उच्छिष्ट मातंगी साधना: पश्चिम दिशा, लाल वस्त्र-आसन, रात्रि 9 बजे बाद। नित्य 51 माला × 21 दिन। 21वें दिन घी की 108 आहुतियों का हवन। सिद्ध यंत्र को चांदी के ताबीज में धारण करें।#उच्छिष्ट मातंगी विधि#पश्चिम दिशा
राजसिक साधना विधिमहाकाल भैरव साधना में कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?महाकाल भैरव साधना में दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।#दक्षिण दिशा#पश्चिम दिशा#भैरव साधना दिशा
पाठ विधि और नियमचन्द्रशेखराष्टकम् पाठ के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?सामान्य: प्रातःकाल पूर्व, सायंकाल पश्चिम दिशा। चन्द्रदोष निवारण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में बैठकर पाठ करना विशेष लाभकारी है।#दिशा#पूर्व दिशा#पश्चिम दिशा