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पश्चिम दिशा से जुड़े सभी प्रश्न(4)

पश्चिम दिशा पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

वरुण देव कौन हैं?

वरुण देव जल के अधिपति, ऋतु के संरक्षक और सत्य के प्रतीक हैं। वे पश्चिम दिशा के लोकपाल हैं और उनका वाहन मकर (मगरमच्छ) है।

#वरुण देव#जल अधिपति#पश्चिम दिशा
पूजा विधान

उच्छिष्ट मातंगी साधना की विधि क्या है?

उच्छिष्ट मातंगी साधना: पश्चिम दिशा, लाल वस्त्र-आसन, रात्रि 9 बजे बाद। नित्य 51 माला × 21 दिन। 21वें दिन घी की 108 आहुतियों का हवन। सिद्ध यंत्र को चांदी के ताबीज में धारण करें।

#उच्छिष्ट मातंगी विधि#पश्चिम दिशा#51 माला 21 दिन
राजसिक साधना विधि

महाकाल भैरव साधना में कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

महाकाल भैरव साधना में दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

#दक्षिण दिशा#पश्चिम दिशा#भैरव साधना दिशा
पाठ विधि और नियम

चन्द्रशेखराष्टकम् पाठ के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

सामान्य: प्रातःकाल पूर्व, सायंकाल पश्चिम दिशा। चन्द्रदोष निवारण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में बैठकर पाठ करना विशेष लाभकारी है।

#दिशा#पूर्व दिशा#पश्चिम दिशा
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